मदरसों को अब नहीं मिलेगी सरकारी मदद, विधानसभा में आज पास होगा बिल

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नई दिल्ली। असम की सरकार मदरसों को मिलने वाली सरकारी मदद को निरस्त करने का विधेयक विधानसभा में पेश करने जा रही है। आज से तीन तीन दिवसीय शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है, जिसमे सरकार विधेयक को अमली जामा पहना देगी। इसकी जानकारी देते हुए कैबिनेट मंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि, मैं आज विधानसभा में मदरसे के प्रांतीयकरण को निरस्त करने के लिए विधेयक पेश करूंगा। ये बिल पास होने के बाद असम सरकार द्वारा मदरसा चलाने की प्रथा पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। इसकी शुरुआत स्वतंत्रता-पूर्व असम में मुस्लिम लीग सरकार द्वारा की गई थी।

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इस बिल के पास होने के बाद राज्य सरकार द्वारा अरबी कॉलेजों और सभी सरकारी मदरसों को मिलने वाली मदद बंद कर दी जाएगी। इसके बाद आगामी शैक्षणिक सत्र से राज्य मदरसा बोर्ड को भी भांग कर दिया जायेगा। उनकी सभी शैक्षणिक गतिविधियों को माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को स्थानांतरित कर दिया जायेगा। वहीं मदरसों में धार्मिक पाठ्यक्रम पढ़ाने वाले टीचरों को अन्य विषय पढ़ाने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। राज्य शिक्षा मंत्री सरमा का कहना है कि, राज्य शिक्षा के सिस्टम को धर्मनिरपेक्ष बनाएगा। आज़ादी से पहले के दिनों में इस्लामी धार्मिक अध्ययनों के लिए सरकारी धन का उपयोग की प्रथा को हम अब खत्म कर रहे हैं।

अगले वर्ष 1 अप्रैल से प्रदेश में सभी धार्मिक पाठ्यक्रमों को रोक लगा दी जाएगी। अंतिम मदरसा परीक्षा 2021 को एसईबीए आयोजित करेगा। राज्य शिक्षा का कहना है कि, हाई स्कूल विद्यालयों में अरबी कॉलेजों को बदला जायेगा। असम उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद में अरबी परिषद के सभी अधिकारियों को को ट्रांसफर किया जायेगा। इसके बाद उन संस्थानों में सामान्य परिषद शिक्षा शुरू की जाएगी। वहीं प्री-सीनियर और सीनियर मदरसों को को अब शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के पाठ्यक्रम को अपने यहां पढ़ाना शुरू करना होगा।

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