Chandra Grahan 2026: फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर आज साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है। ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले यानी सुबह 6 बजकर 20 मिनट से सूतक काल प्रारंभ हो चुका है और यह ग्रहण समाप्त होने तक प्रभावी रहेगा। सनातन परंपरा में चंद्र या सूर्य ग्रहण के दौरान सूतक लगने की मान्यता है। इसे एक विशेष समय माना जाता है, जब वातावरण और मन की ऊर्जा में बदलाव होता है।
धार्मिक दृष्टि से सूतक को अशुद्धि का काल माना गया है, इसलिए इस दौरान पूजा-पाठ, शुभ कार्य और मांगलिक आयोजन करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि यह आस्था और परंपरा से जुड़ा विषय है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग आज भी इन नियमों का पालन करते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और किन कामों से परहेज करना चाहिए।
सूतक काल में भूलकर भी न करें ये काम
मान्यता के अनुसार सूतक लगने के बाद देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श नहीं करना चाहिए और न ही नियमित पूजा-अर्चना करनी चाहिए। मंदिरों के कपाट भी कई जगह इस दौरान बंद रखे जाते हैं। भोजन पकाने और पहले से बने भोजन को खाने से भी परहेज करने की परंपरा है। हालांकि यह नियम बीमार व्यक्ति, गर्भवती महिला और छोटे बच्चों पर लागू नहीं माना जाता।
सूतक काल में किसी भी प्रकार का शुभ या मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार शुरू करना या नई वस्तु की खरीदारी करना टाल देना चाहिए। बाल और दाढ़ी कटवाना भी इस समय वर्जित माना गया है। जरूरत न हो तो घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा वाद-विवाद, क्रोध या नकारात्मक विचारों से दूर रहने को भी कहा गया है, क्योंकि यह समय मानसिक संयम का माना जाता है।
सूतक काल में क्या करना होता है शुभ?
जहां एक ओर कई कामों से परहेज की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर इस समय को आध्यात्मिक साधना के लिए बेहद फलदायी माना गया है। मान्यता है कि सूतक काल में किया गया मंत्र जप सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य प्रदान करता है।
यदि संभव हो तो किसी शांत और पवित्र स्थान पर बैठकर अपने आराध्य देवता का ध्यान और मंत्र जप करना शुभ माना गया है। विशेष रूप से Vishnu और चंद्र देव के मंत्रों का जाप करने की परंपरा बताई जाती है। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ चंद्राय नमः” जैसे मंत्रों का जप मन को स्थिर और शांत रखने में सहायक माना जाता है।
इसके अलावा ध्यान, भजन और धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी इस दौरान किया जा सकता है। सूतक को आत्ममंथन और भीतर झांकने का समय माना गया है, इसलिए सकारात्मक सोच और संयम बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण उपाय बताया गया है।
डर नहीं, सजगता जरूरी
चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है, लेकिन भारतीय संस्कृति में इसे आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना गया है। सूतक काल को लेकर अलग-अलग मान्यताएं और परंपराएं हैं, जिनका पालन व्यक्ति अपनी आस्था के अनुसार करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय सबसे जरूरी है मानसिक शांति और सकारात्मक दृष्टिकोण। अनावश्यक भय या भ्रम में पड़ने की जरूरत नहीं है। यदि परंपराओं का पालन करना चाहें तो संयम, स्वच्छता और सद्भाव बनाए रखें।
अंत में यही कहा जा सकता है कि सूतक काल में सावधानी और श्रद्धा के साथ दिन बिताएं। शुभ कार्य टाल दें, मन को शांत रखें और ईश्वर का स्मरण करें। यही सरल उपाय इस समय को सकारात्मक बना सकते हैं।








