मौत सामने थी, फिर भी दूसरों को बचाने के लिए आग में कूद पड़े युवक, जानें दिल्ली अग्निकांड के असली हीरो की कहानी

दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। होटल में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया और चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। धुएं और आग की लपटों के बीच कई लोग होटल के अंदर फंस गए थे। इस दर्दनाक हादसे में 21 लोगों की जान चली गई, लेकिन इसी त्रासदी के बीच कुछ ऐसे चेहरे भी सामने आए जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जिंदगी बचाने का फैसला किया। आग लगने के शुरुआती समय में जब दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचने की कोशिश कर रही थीं, तब स्थानीय युवाओं ने खुद मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने होटल के अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने, उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर अस्पताल ले जाने तक का काम किया। उनकी बहादुरी के कारण कई लोगों की जान बच सकी।

धुएं और लपटों के बीच लोगों को कंधों पर उठाकर निकाला

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के बाद होटल में मौजूद लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। हालात इतने खराब थे कि कई लोग बाहर निकलने का रास्ता नहीं खोज पा रहे थे। ऐसे समय में आसपास रहने वाले कुछ युवक बिना किसी सुरक्षा उपकरण के होटल के अंदर पहुंचे। उन्होंने कमरों और गलियारों में फंसे लोगों को बाहर निकालना शुरू किया। कई लोगों को कंधों पर उठाकर सुरक्षित जगह पहुंचाया गया। कुछ लोग बेहोश हो चुके थे, जिन्हें तुरंत बाहर लाकर प्राथमिक सहायता दी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ये युवक समय रहते मदद के लिए आगे नहीं आते तो मृतकों की संख्या और अधिक हो सकती थी। बचाव कार्य में शामिल युवाओं ने न केवल लोगों को बाहर निकाला बल्कि घायलों को अस्पताल पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाई।

सीपीआर देकर बचाईं कई जिंदगियां

इस हादसे के दौरान कुछ युवाओं ने केवल रेस्क्यू ही नहीं किया, बल्कि प्राथमिक चिकित्सा देकर भी लोगों की जान बचाने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि कई पीड़ितों की सांसें धीमी पड़ गई थीं और कुछ लोग बेहोशी की हालत में थे। ऐसे में स्थानीय युवाओं ने उन्हें सीपीआर देकर जीवन बचाने का प्रयास किया। उनके इस प्रयास की कई लोगों ने सराहना की है। क्षेत्रीय विधायक सतीश उपाध्याय ने भी इन युवाओं के साहस और सेवा भावना की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में इन लोगों ने इंसानियत का सबसे बड़ा उदाहरण पेश किया है। उनके अनुसार, आग और धुएं के बीच जाकर लोगों को बचाना किसी भी व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता, लेकिन इन युवाओं ने बिना डरे यह जिम्मेदारी निभाई। सोशल मीडिया पर भी लोग उनकी बहादुरी को सलाम कर रहे हैं।

पुलिस और प्रशासन ने भी दिखाई बहादुरी

अग्निकांड के दौरान स्थानीय लोगों के साथ-साथ पुलिस और प्रशासनिक टीमों ने भी पूरी ताकत के साथ बचाव अभियान चलाया। कई पुलिसकर्मी होटल के अंदर जाकर लोगों को बाहर निकालते रहे, जबकि आग लगातार फैल रही थी। इस दौरान लगभग 10 पुलिसकर्मी घायल भी हुए। बावजूद इसके उन्होंने अपना काम जारी रखा और कई लोगों की जान बचाने में सफलता हासिल की। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हादसा केवल एक दुखद घटना नहीं, बल्कि इंसानियत, साहस और एकजुटता की मिसाल भी बन गया। जब संकट की घड़ी आई तो धर्म, जाति और पहचान से ऊपर उठकर लोगों ने एक-दूसरे की मदद की। मालवीय नगर अग्निकांड ने जहां कई परिवारों को गहरा दुख दिया, वहीं कुछ ऐसे रियल लाइफ हीरो भी सामने लाए जिन्होंने साबित कर दिया कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।

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