गोंडा में हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़े जाने को लेकर दिए गए अपने बयान पर पूर्व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने सफाई देते हुए विवाद को शांत करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि उनका बयान अधूरा समझा गया, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान पूरी तरह सही है। मंगलवार मीडिया से बातचीत में बृजभूषण सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी मुख्यमंत्री की बात का विरोध नहीं किया। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि उनके बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें क्षमा मांगने में कोई संकोच नहीं है।
सीढ़ियों पर नहीं, परिसर में नमाज की बात
बृजभूषण शरण सिंह ने बताया कि उनसे सवाल पूछा गया था कि क्या हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी। इस पर उन्होंने जवाब दिया था कि सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई। हालांकि उन्होंने माना कि उसी समय यह भी स्पष्ट कर देना चाहिए था कि 52 बीघा परिसर या किसी संत के स्थान पर नमाज पढ़े जाने की बात सामने आई थी। उन्होंने कहा कि इसी अधूरी जानकारी के कारण उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और विवाद बढ़ गया।
पूर्व सांसद ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान भी सही है, अयोध्या के संतों का बयान भी सही है और उनका बयान भी अपने संदर्भ में सही था। उन्होंने कहा, “अगर मैं उसी समय दूसरी पंक्ति में यह भी कह देता कि सीढ़ियों पर नहीं, बल्कि परिसर में नमाज पढ़ी गई थी, तो शायद इतना बड़ा विवाद नहीं होता।”
मुख्यमंत्री की बात काटने का सवाल नहीं
बृजभूषण सिंह ने कहा कि उनके मन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बात का विरोध करने का कोई विचार नहीं था। उन्होंने कहा, “अगर किसी को ऐसा लगा कि मैं मुख्यमंत्री की बात काट रहा हूं, तो यह पूरी तरह गलत है। मुख्यमंत्री की बात काटने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।”
उन्होंने यह भी बताया कि हनुमानगढ़ी का नाम आते ही वह भावुक हो गए थे। उन्होंने कहा कि वह हनुमान जी के भक्त हैं और अयोध्या से उनका गहरा नाता है। जब उनसे हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने की बात पूछी गई तो उन्हें बहुत रोष आया और उसी भावुकता में उन्होंने अधूरा जवाब दे दिया।
निर्माण को लेकर भी दी सफाई
बृजभूषण सिंह ने अपने उस बयान पर भी सफाई दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि हनुमानगढ़ी के निर्माण में एक मुस्लिम का योगदान रहा था। उन्होंने कहा कि यह बात अधूरी तरह से सामने आई। उनके अनुसार धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव द्वारा हनुमानगढ़ी का उल्लेख मिलता है, इसलिए यह कहना उचित नहीं कि इसका निर्माण किसी एक व्यक्ति ने कराया।
उन्होंने दावा किया कि 18वीं शताब्दी में शुजाउद्दौला याचक के रूप में वहां आया था। बाद में नागा साधुओं और मुस्लिम पक्ष के बीच संघर्ष के बाद उसने 52 बीघा भूमि का पट्टा दिया और निर्माण कार्य में सहयोग किया। बृजभूषण सिंह ने कहा कि बाद में इंटरनेट पर इस जानकारी को गलत तरीके से हनुमानगढ़ी के निर्माण से जोड़ दिया गया।
भावनाएं आहत होने पर मांगी क्षमा
पूर्व सांसद ने कहा कि हनुमानगढ़ी पर सदियों तक आक्रांताओं के हमले हुए, लेकिन नागा साधुओं ने कभी उसे ध्वस्त नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि यदि 17 जुलाई को दिए गए उनके बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वह क्षमा मांगते हैं।
बृजभूषण सिंह ने यह भी कहा कि राम जन्मभूमि, सनातन धर्म और साधु-संतों से जुड़े हर आंदोलन में वह हमेशा उनके साथ खड़े रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि उनका उद्देश्य किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था, बल्कि केवल तथ्य स्पष्ट करना था।
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