मध्य प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पास हो गया। इसके साथ ही मध्य प्रदेश देश का चौथा राज्य बन गया है, जहां UCC को विधानसभा की मंजूरी मिल चुकी है। इससे पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम इस दिशा में कदम उठा चुके हैं। सदन में बिल पर लंबी चर्चा हुई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। आखिरकार बहुमत के आधार पर विधेयक पास हो गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे राज्य के लिए ऐतिहासिक दिन बताया और कहा कि यह फैसला सभी नागरिकों के लिए समान कानून की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं विपक्ष ने बिल को लेकर अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराईं और सरकार के दावों पर सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री ने समर्थन को लेकर किया बड़ा दावा
विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि UCC किसी एक धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान व्यवस्था का कानून है। उन्होंने दावा किया कि 76 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं और 40 प्रतिशत मुस्लिम पुरुषों ने इस कानून का समर्थन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब किसी भी तरह के भेदभाव को खत्म करने की दिशा में यह बड़ा कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और उसी भावना के साथ यह कानून लाया गया है। हालांकि, मुख्यमंत्री द्वारा किए गए इन समर्थन संबंधी दावों का स्रोत सदन में विस्तार से नहीं बताया गया।
कांग्रेस पर साधा निशाना, सदन में हुई तीखी बहस
बिल पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर वोट बैंक की राजनीति कर रहा है और समान कानून का विरोध कर रहा है। मुख्यमंत्री ने 1959 का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने भी विधानसभा में समानता से जुड़े कई कानून पारित किए थे, इसलिए अब इस बिल का विरोध करना उचित नहीं है। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार नारेबाजी भी हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को एक संविधान और समान कानून की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए। वहीं कांग्रेस के विधायकों ने सरकार के दावों और विधेयक के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए विरोध दर्ज कराया।
अब आगे क्या होगा, इस पर सबकी नजर
विधानसभा से बिल पारित होने के बाद अब आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद नियम बनाकर कानून को लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इस कानून से सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित होंगे और कानूनी व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी। दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि बिल के कई पहलुओं पर अभी और चर्चा की जरूरत है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में UCC का मुद्दा मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है। फिलहाल विधानसभा में बिल पास होने के बाद प्रदेश की राजनीति में इसकी गूंज तेज हो गई है।
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