मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने ईरान पर हुए हमले और वहां के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत की खबर पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह ईरान पर हुए हमले की निंदा करते हैं, लेकिन साथ ही जम्मू-कश्मीर के लोगों से अपील भी की कि वे भावनाओं में बहकर कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगाड़ने वाली कोई हरकत न करें। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजरायल की ओर से कथित संयुक्त कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और कश्मीर में भी इसके असर साफ दिखाई दे रहे हैं।
ईरान पर हमला और सीएम का कड़ा सवाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी देश की सरकार बदलने या उसके नेतृत्व को हटाने का अधिकार केवल उस देश के नागरिकों को होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस अधिकार के तहत बाहरी ताकतें किसी संप्रभु देश के शीर्ष नेता को निशाना बना सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस तरह की कार्रवाई को सही ठहराया जाता है तो फिर दुनिया के कई अन्य विवादों को भी उसी नजर से देखा जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और अधिक अस्थिर हो सकती है।
उनका यह बयान सीधे तौर पर वैश्विक राजनीति की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीतिक मर्यादाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और संवाद ही स्थायी रास्ता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी सरकार की पहली प्राथमिकता है।
कश्मीर में गुस्सा, सड़कों पर प्रदर्शन
ईरान में हुई इस घटना के बाद कश्मीर घाटी में शिया समुदाय के बीच गहरा आक्रोश देखा गया। लाल चौक, सैदा कदल, बडगाम, बांदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा जैसे इलाकों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारे लगाए और घटना की कड़ी निंदा की। कई जगह लोगों को मातमी जुलूस निकालते और सीना पीटते हुए भी देखा गया।
कश्मीर में शिया समुदाय की बड़ी आबादी है और धार्मिक रूप से ईरान के साथ भावनात्मक जुड़ाव भी माना जाता है। ऐसे में वहां के सर्वोच्च नेता की मौत की खबर ने स्वाभाविक रूप से भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा की। प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
छात्रों की सुरक्षा पर सरकार की नजर
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उनकी सरकार ईरान में रह रहे जम्मू-कश्मीर के छात्रों और अन्य निवासियों की सुरक्षा को लेकर लगातार केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय के संपर्क में है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो छात्रों को सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा।
कई परिवार अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, जो पढ़ाई या अन्य कारणों से ईरान में रह रहे हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार किसी भी नागरिक को असुरक्षित नहीं छोड़ेगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
शांति की अपील और बड़ा संदेश
मुख्यमंत्री का बयान दो हिस्सों में बंटा नजर आता है—एक तरफ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम की स्पष्ट निंदा और दूसरी ओर कश्मीर के लोगों से संयम की अपील। उन्होंने कहा कि दुख और आक्रोश स्वाभाविक हैं, लेकिन किसी भी हाल में हिंसा या कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर ने लंबे समय तक अशांति का दौर देखा है और अब शांति और विकास की राह पर आगे बढ़ना जरूरी है। ऐसे में किसी भी बाहरी घटना के कारण यहां का माहौल खराब नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखें और शांति बनाए रखें।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वैश्विक राजनीति का असर स्थानीय स्तर पर कितनी तेजी से दिखाई देता है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। फिलहाल सरकार शांति बनाए रखने और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय दिखाई दे रही है।
Read more-स्मार्टफोन बना ‘साइलेंट किलर’: जानिए कैसे खामेनेई के अंगरक्षकों के फोन ने ही दिया धोखा








