क्या रूस खत्म करेगा ईरान-अमेरिका तनाव? पुतिन की अचानक एंट्री से बदला खेल!

ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में हुई अहम वार्ता के बेनतीजा खत्म होने के बाद दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। इसी बीच रूस ने एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाते हुए खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश किया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बातचीत की और शांति प्रक्रिया में सहयोग का प्रस्ताव दिया। क्रेमलिन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, पुतिन ने मध्य पूर्व में स्थायी और न्यायपूर्ण शांति स्थापित करने के लिए राजनीतिक और राजनयिक समाधान पर जोर दिया। इस कदम को ऐसे समय में उठाया गया है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है और युद्ध का खतरा लगातार बना हुआ है।

क्या अमेरिका मानेगा रूस की मध्यस्थता? बड़ा सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका रूस की इस पेशकश को स्वीकार करेगा? अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकार मानते हैं कि यह स्थिति थोड़ी जटिल जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। दरअसल, पहले भी यूक्रेन संकट के दौरान अमेरिका और रूस ने अप्रत्यक्ष रूप से एक-दूसरे के जरिए संवाद बनाए रखा है। ऐसे में यह संभव है कि इस बार भी दोनों देश किसी तीसरे रास्ते पर सहमत हो जाएं। यह भी चर्चा है कि रूस ने यह पहल या तो ईरान के अनुरोध पर की है या फिर इसके पीछे अमेरिका की भी आंशिक सहमति हो सकती है। हालांकि, आने वाले कुछ दिनों में यह साफ हो जाएगा कि दोनों देश रूस की भूमिका को किस नजरिए से देखते हैं।

यूरोप और ब्रिटेन की चिंता, कूटनीति पर जोर

ईरान-अमेरिका वार्ता के विफल होने के बाद यूरोप और ब्रिटेन ने भी चिंता जाहिर की है। यूरोपीय संघ ने साफ कहा है कि मौजूदा हालात में कूटनीति ही सबसे जरूरी रास्ता है। संघ के प्रवक्ताओं ने पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बातचीत जारी रखना बेहद जरूरी है। वहीं ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने निराशा जताते हुए कहा कि अभी तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोशिशें बंद कर दी जाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कूटनीति में धैर्य जरूरी होता है और अंततः बातचीत से ही समाधान निकल सकता है।

पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया की अपील, क्या बनेगा नया रास्ता?

इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी अहम रही है, जिसने इस वार्ता की मेजबानी की थी। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने दोनों देशों से युद्धविराम बनाए रखने और बातचीत जारी रखने की अपील की है। वहीं ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने भी बातचीत को फिर से शुरू करने पर जोर दिया है। वैश्विक स्तर पर जिस तरह से अलग-अलग देश शांति की अपील कर रहे हैं, उससे साफ है कि कोई भी देश इस तनाव को युद्ध में बदलते नहीं देखना चाहता। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रूस की मध्यस्थता से कोई नया रास्ता निकल पाएगा या फिर यह संकट और गहराता जाएगा।

Read more-ट्रेन की अपर बर्थ पर बना ‘चलता-फिरता मंदिर’! भजन-कीर्तन का वीडियो वायरल, लोगों में छिड़ी तीखी बहस

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img