15 मौतों के बाद जागा प्रशासन! अब गिरेगी वह इमारत, जिस पर पहले भी हो चुका था ध्वस्तीकरण का आदेश

Lucknow Fire Case: लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद प्रशासन ने उस इमारत के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है, जहां हादसे में 15 छात्रों की जान चली गई थी। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भवन मालिक को नया ध्वस्तीकरण नोटिस जारी करते हुए 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है। अधिकारियों का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इमारत को गिराने की कार्रवाई की जाएगी। इस कदम के बाद सवाल उठ रहे हैं कि जिस भवन को अब अवैध बताया जा रहा है, वह इतने वर्षों तक कार्रवाई से कैसे बचा रहा।

 2016 में भी जारी हुआ था ध्वस्तीकरण आदेश

जांच में सामने आया है कि इस भवन को लेकर वर्ष 2016 में भी ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। आरोप हैं कि बाद में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बीच मामला लंबे समय तक अटका रहा, जिसके कारण आदेश जमीन पर लागू नहीं हो सका। इसी दौरान इमारत में विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियां चलती रहीं। अब हादसे के बाद एलडीए ने पुराने रिकॉर्ड खंगालते हुए फिर से कार्रवाई शुरू की है। एलडीए के अधिकारियों का कहना है कि भवन के निर्माण और उपयोग में कई स्तरों पर नियमों का उल्लंघन पाया गया है, जिसके आधार पर दोबारा नोटिस जारी किया गया है।

 नोटिस के बाद बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार भवन स्वामी को 15 दिन का समय दिया गया है ताकि वह अपना पक्ष रख सके। इसके बाद निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि हादसे के बाद शहर में ऐसे अन्य भवनों की भी जांच शुरू की गई है, जहां मानकों के विपरीत निर्माण या व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक यदि किसी भवन में गंभीर अनियमितताएं पाई जाती हैं तो उसके खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। इस कार्रवाई को राजधानी में अवैध निर्माणों के खिलाफ बड़े अभियान की शुरुआत माना जा रहा है।

हादसे ने खड़े किए कई सवाल

अग्निकांड के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पुराने आदेश पर समय रहते अमल हो जाता तो क्या इतना बड़ा हादसा टल सकता था। आग लगने के बाद इमारत में फंसे छात्रों को बाहर निकालने में काफी मुश्किलें आईं और कई लोगों की जान चली गई। अब प्रशासन दोष तय करने और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रहा है। दूसरी ओर पीड़ित परिवारों का कहना है कि केवल इमारत गिराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर वर्षों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। फिलहाल सभी की नजर एलडीए की आगामी कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।

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