तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट में उस समय झटका लगा, जब धार्मिक भावनाएं आहत करने से जुड़े मामले में व्यक्तिगत रूप से पुलिस के सामने पेश होने से छूट मांगने वाली उनकी याचिका पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। महुआ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूछताछ में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। उनका कहना था कि पुलिस स्टेशन जाने पर उनके साथ बदसलूकी या विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट
इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने 21 जुलाई को महुआ मोइत्रा को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें जांच में सहयोग करने और 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था। इसी आदेश में बदलाव की मांग को लेकर महुआ ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उनका मामला सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट से जुड़ा है, जिस पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया गया है।
अंडे फेंके जाने की दलील पर कोर्ट नाराज
सुप्रीम कोर्ट में महुआ की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि पिछली बार अपने संसदीय क्षेत्र के पुलिस स्टेशन जाने पर महुआ पर अंडे फेंके गए थे। वकील ने यह भी दावा किया कि उन्हें दोबारा हमले की धमकियां मिल रही हैं। इस पर जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या सांसद होने के बावजूद उन्हें अंडे फेंके जाने से डर लगता है।
कोर्ट की टिप्पणी के बाद वापस ली याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि विरोध या प्रदर्शन की आशंका किसी जनप्रतिनिधि को जांच में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने से छूट देने का पर्याप्त आधार नहीं है। कोर्ट की नाराजगी को देखते हुए महुआ मोइत्रा के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। इसके बाद अदालत ने याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी। अब महुआ को हाई कोर्ट के निर्देश के मुताबिक जांच प्रक्रिया में सहयोग करना होगा।
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