रात के अंधेरे में बेकाबू हुई उज्जैनी एक्सप्रेस… दीवार तोड़ते हुए पटरी से उतरा इंजन, बड़ा हादसा टला

Rishikesh Train Accident: उत्तराखंड के ऋषिकेश में मंगलवार रात उस समय हड़कंप मच गया, जब उज्जैनी एक्सप्रेस शंटिंग के दौरान अचानक बेकाबू हो गई। ट्रेन का इंजन और कुछ कोच पटरी से उतरते हुए दीवार तोड़कर आगे निकल गए। हादसा ऋषिकेश रेलवे स्टेशन यार्ड के पास खांड गांव क्षेत्र में हुआ। घटना के तुरंत बाद रेलवे प्रशासन, आरपीएफ और तकनीकी टीम मौके पर पहुंच गई। राहत की बात यह रही कि ट्रेन उस समय खाली थी और उसमें कोई यात्री सवार नहीं था। अगर यही हादसा यात्रियों से भरी ट्रेन के साथ होता, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। हादसे की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हादसे के वक्त जोरदार आवाज सुनाई दी, जिसके बाद आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

शंटिंग के दौरान कैसे हुआ हादसा?

रेलवे अधिकारियों के अनुसार गाड़ी संख्या 14317 उज्जैनी एक्सप्रेस की स्टेशन यार्ड में शंटिंग प्रक्रिया चल रही थी। यह ट्रेन सुबह करीब छह बजे रवाना होने वाली थी, इसलिए रात में उसकी तकनीकी तैयारी और कोच मूवमेंट किया जा रहा था। इसी दौरान अचानक ट्रेन का नियंत्रण बिगड़ गया और इंजन पटरी से उतर गया। शुरुआती जांच में ब्रेक सिस्टम में तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि ट्रेन की गति ज्यादा नहीं थी, लेकिन नियंत्रण पूरी तरह बिगड़ने के कारण इंजन आगे बढ़ता चला गया और दीवार तोड़ दी। घटना की सूचना रात करीब दस बजे आरपीएफ को मिली, जिसके बाद पुलिस और रेलवे अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक महेश यादव ने बताया कि फिलहाल तकनीकी जांच जारी है और हादसे के सही कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

रेलवे प्रशासन ने शुरू की जांच, कई सवाल खड़े

इस घटना के बाद रेलवे की तकनीकी निगरानी और सुरक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। पिछले कुछ समय में रेलवे से जुड़े कई छोटे-बड़े हादसे सामने आए हैं, जिनके बाद सुरक्षा मानकों को लेकर लगातार बहस होती रही है। ऋषिकेश में हुआ यह हादसा भले ही बिना किसी जनहानि के खत्म हो गया, लेकिन इससे रेलवे प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हादसे की जांच कई स्तरों पर की जाएगी। तकनीकी विशेषज्ञ इंजन, ब्रेक सिस्टम और शंटिंग प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं। आरपीएफ अधीक्षक सरोज कुमार ने कहा कि हादसा क्यों हुआ और इसके पीछे तकनीकी चूक थी या मानवीय गलती, इसकी पूरी जांच की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रेन पूरी तरह खाली थी, इसलिए कोई यात्री घायल नहीं हुआ। इसके बावजूद इस घटना ने रेलवे संचालन की सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।

बड़ा हादसा टलने से लोगों ने ली राहत की सांस

स्थानीय लोगों और रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि यदि ट्रेन में यात्री मौजूद होते तो नुकसान काफी बड़ा हो सकता था। ट्रेन के खाली होने के कारण ही बड़ी जनहानि टल गई। हादसे के बाद रेलवे ट्रैक के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई और तकनीकी टीमों ने पटरी से उतरे इंजन और कोच को हटाने का काम शुरू कर दिया। रेलवे प्रशासन अब इस बात की भी समीक्षा कर रहा है कि शंटिंग के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन सही तरीके से हुआ था या नहीं। सोशल मीडिया पर भी इस हादसे के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें ट्रेन का इंजन दीवार तोड़कर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। लोग रेलवे की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फिलहाल रेलवे का पूरा ध्यान जांच पूरी करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने पर है।

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