Supreme Court on Stray Dogs: देशभर में बढ़ती डॉग बाइट घटनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने पुराने आदेश में बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया। इसके साथ ही डॉग लवर्स और कई NGO द्वारा दाखिल याचिकाएं भी खारिज कर दी गईं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और आम लोगों पर लगातार हो रहे कुत्तों के हमलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो सार्वजनिक जगहों पर “सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट” जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी, जो संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है। अदालत ने यह भी कहा कि गरिमा के साथ जीने के अधिकार में बिना डर के सार्वजनिक स्थानों पर घूमने की आजादी भी शामिल है। सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने साफ कर दिया कि राज्यों और स्थानीय निकायों को अब इस मामले में गंभीरता दिखानी होगी।
डॉग बाइट मामलों पर कोर्ट की चिंता
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देशभर से सामने आए डॉग बाइट मामलों पर गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि कई रिपोर्टों में छोटे बच्चों, बुजुर्गों और विदेशी यात्रियों तक को आवारा कुत्तों ने निशाना बनाया है। अदालत ने दिल्ली के IGI एयरपोर्ट, रिहायशी इलाकों और शहरों में लगातार बढ़ रही घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह शहरी प्रशासन की बड़ी विफलता को दिखाता है। कोर्ट ने राजस्थान के श्रीगंगानगर का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां एक महीने में 1084 डॉग बाइट केस सामने आए। वहीं तमिलनाडु में साल के शुरुआती चार महीनों में करीब दो लाख मामले दर्ज किए गए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Animal Birth Control यानी ABC फ्रेमवर्क को प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया, जिसकी वजह से समस्या लगातार बढ़ती चली गई। अदालत ने साफ कहा कि केवल कागजों पर नसबंदी और वैक्सीनेशन अभियान चलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
कोर्ट ने दिए कई बड़े निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में राज्यों, नगर निगमों और NHAI को कई अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, खेल परिसर और हाईवे जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन कुत्तों में रेबीज नहीं है और जो आक्रामक नहीं हैं, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जा सकता है। लेकिन रेबीज संक्रमित या हिंसक व्यवहार वाले कुत्तों को अलग शेल्टर में रखा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर भी रोक लगाने की बात कही है। इसके लिए नगर निगमों को अलग फीडिंग जोन बनाने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि यदि कोई अधिकारी या राज्य सरकार इन आदेशों का पालन नहीं करती है तो उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई हो सकती है। कोर्ट ने 17 नवंबर तक सभी राज्यों और संबंधित एजेंसियों से अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।
डॉग लवर्स की दलीलें नहीं मानी गई
इस मामले में कई डॉग लवर्स और पशु कल्याण से जुड़े संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट से पुराने आदेशों में बदलाव की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों के मुद्दे पर केवल भावनात्मक नजरिया अपनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। पिछली सुनवाई में अदालत ने यह भी कहा था कि अगर किसी इलाके में किसी कुत्ते के हमले से किसी व्यक्ति की मौत या चोट होती है तो वहां के स्थानीय निकाय के साथ-साथ नियमित रूप से कुत्तों को खाना खिलाने वालों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। सुप्रीम Court ने राज्यों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे अब “मूक दर्शक” बनकर नहीं रह सकते। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि संविधान ऐसे समाज की कल्पना नहीं करता, जहां लोग केवल शारीरिक ताकत के भरोसे सड़कों पर सुरक्षित रह सकें। अब इस फैसले के बाद देशभर में आवारा कुत्तों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
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