Hapur News: उत्तर प्रदेश के हापुड़ में सोमवार सुबह एक निजी अस्पताल में अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक अस्पताल में लगे एक एयर कंडीशनर (एसी) में तकनीकी खराबी के कारण तेज धमाका हुआ, जिसके बाद आग तेजी से फैलने लगी। कुछ ही देर में अस्पताल के कई हिस्सों में धुआं भर गया, जिससे मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल कर्मचारियों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने तुरंत आपातकालीन व्यवस्था लागू की और मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया। राहत की बात यह रही कि समय पर कार्रवाई होने से किसी बड़े हादसे की खबर सामने नहीं आई।
धुएं के बीच कर्मचारियों ने दिखाई बहादुरी
आग लगने के समय अस्पताल में कई मरीज भर्ती थे, जिनमें कुछ आईसीयू और इमरजेंसी वार्ड में इलाज करा रहे थे। जैसे ही धुआं पूरे भवन में फैलने लगा, डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों ने बिना समय गंवाए रेस्क्यू शुरू कर दिया। जो मरीज खुद चल सकते थे, उन्हें तुरंत बाहर ले जाया गया, जबकि गंभीर और बुजुर्ग मरीजों को कर्मचारियों ने अपनी गोद में उठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। अस्पताल में मौजूद लोगों ने भी इस राहत अभियान में सहयोग किया। कुछ समय के लिए अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी जरूर रही, लेकिन कर्मचारियों की सूझबूझ और तेजी के कारण सभी मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस दौरान सबसे बड़ी चुनौती धुएं के कारण सांस लेने में हो रही परेशानी थी, लेकिन टीम ने हालात पर नियंत्रण बनाए रखा।
मौके पर पहुंची दमकल और पुलिस
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की कई टीमें अस्पताल पहुंच गईं। फायर ब्रिगेड के जवानों ने तुरंत आग बुझाने का अभियान शुरू किया और चारों ओर से पानी की बौछार कर आग को फैलने से रोक दिया। अधिकारियों की कोशिश रही कि आग अस्पताल के दूसरे हिस्सों, मेडिकल स्टोर या ऑक्सीजन से जुड़े क्षेत्रों तक न पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि एसी में शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी के कारण ब्लास्ट हुआ, जिसके बाद आग लगी। हालांकि घटना के सही कारणों की पुष्टि के लिए विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस ने भी पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगहों पर बिजली के उपकरणों की समय-समय पर जांच और फायर सेफ्टी सिस्टम की नियमित देखरेख बेहद जरूरी है। अगर ऐसी घटनाओं में कुछ मिनट की भी देरी हो जाए तो बड़ा नुकसान हो सकता है। फिलहाल हापुड़ के इस अस्पताल में सभी मरीज सुरक्षित बताए जा रहे हैं और जरूरत के अनुसार उन्हें दूसरे वार्डों या अस्पतालों में शिफ्ट किया जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। साथ ही घटना की जांच पूरी होने के बाद यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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