‘स्मार्ट मीटर’ पर बड़ा यू-टर्न! विरोध के आगे झुकी सरकार या कोई और खेल? अब बिल वापसी की उठी नई मांग

उत्तर प्रदेश में लंबे समय से विवादों में घिरी प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना पर सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए इसे अनिवार्य रूप से लागू करने की व्यवस्था खत्म कर दी है। अब नए बिजली कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड मीटर जरूरी नहीं होगा, और जिन घरों में पहले से ऐसे मीटर लगे हैं, उन्हें भी पोस्टपेड सिस्टम में बदला जाएगा। यह फैसला ऐसे समय आया है जब प्रदेश के कई जिलों में उपभोक्ता लगातार बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। आम लोगों का आरोप था कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिल अचानक कई गुना बढ़ गए, जिससे घरेलू बजट बिगड़ गया। सरकार के इस कदम को फिलहाल राहत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसके पीछे की वजहों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

विपक्ष ने बताया जनता की जीत, सरकार पर साधा निशाना

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस फैसले को जनता और विपक्ष के दबाव का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि लगातार विरोध और जागरूकता के कारण सरकार को पीछे हटना पड़ा। उनके मुताबिक, प्रीपेड मीटर व्यवस्था में कई खामियां थीं, जिनकी वजह से आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी व्यवस्था भ्रष्टाचार से जुड़ी हुई थी और जनता को परेशान करने का जरिया बन गई थी। अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि सरकार को अब यह स्वीकार करना चाहिए कि यह योजना सही तरीके से लागू नहीं हो सकी और लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज किया गया।

बढ़े हुए बिल लौटाने की मांग, आंदोलन की चेतावनी

विपक्ष ने सिर्फ योजना खत्म करने पर ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े आर्थिक नुकसान की भरपाई की भी मांग उठाई है। अखिलेश यादव ने कहा कि जिन उपभोक्ताओं से ज्यादा बिजली बिल वसूला गया है, उसका समायोजन अगले बिलों में किया जाना चाहिए या फिर पैसा वापस किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जब तकनीक का इस्तेमाल अन्य कामों में किया जा सकता है, तो उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए भी इसका उपयोग होना चाहिए। वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि जब तक पूरी तरह से उपभोक्ताओं का शोषण बंद नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में बिजली बिल पहले के मुकाबले चार से पांच गुना तक बढ़ गए थे।

जनता की परेशानी और आगे की राह पर नजर

प्रदेश के कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की थी कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनका मासिक बिल अचानक बहुत ज्यादा आने लगा, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ गया। कई जगहों पर लोग सड़कों पर उतरकर विरोध करते नजर आए। सरकार के फैसले के बाद फिलहाल स्थिति शांत होती दिख रही है, लेकिन विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाए रखने की तैयारी में है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार बढ़े हुए बिलों को लेकर कोई ठोस कदम उठाएगी या मामला यहीं ठंडा पड़ जाएगा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और सियासी बयानबाजी और संभावित फैसलों पर सबकी नजर बनी रहेगी, क्योंकि यह सीधे तौर पर आम जनता की जेब से जुड़ा मामला है।

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