‘ब्राह्मणों को डर लगता है…’ ट्रोलर की टिप्पणी पर अश्विन का पलटवार, क्या कहा कि छा गया जवाब?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों ने इस बार राजनीति में बड़ा बदलाव दिखाया है। Thalapathy Vijay की पार्टी टीवीके ने अपने पहले ही चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जगह बनाई। इस जीत के बाद देशभर से उन्हें बधाइयां मिलने लगीं। इसी कड़ी में भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी खिलाड़ी Ravichandran Ashwin ने भी विजय को खास अंदाज में शुभकामनाएं दीं। लेकिन उनका यह पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया, जहां कुछ यूजर्स ने उनकी सराहना की तो कुछ ने उन्हें ट्रोल करने की कोशिश की।

अश्विन का बधाई संदेश और ट्रोलिंग की शुरुआत

अश्विन ने विजय और उनकी पार्टी को ऐतिहासिक सफलता पर बधाई देते हुए लिखा कि वह सिर्फ एक फैन ही नहीं, बल्कि एक ऐसे नेता के अनुयायी बनना चाहेंगे, जो समाज को आगे बढ़ाने का रास्ता दिखाए। उनके इस बयान को कई लोगों ने सकारात्मक रूप से लिया, लेकिन कुछ यूजर्स ने इसे लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की। एक ट्रोलर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अश्विन जैसे ब्राह्मण द्रविड़ राजनीति से डरते हैं। इस टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी और देखते ही देखते यह मुद्दा वायरल हो गया।

ट्रोलर को अश्विन का सधा हुआ जवाब

ट्रोलिंग का जवाब देने में अश्विन ने संयम और स्पष्टता का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि किसी का जन्म किस परिवार या जाति में होता है, यह उसके नियंत्रण में नहीं होता। उन्होंने अपने माता-पिता और शिक्षकों का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने उन्हें समानता, सहानुभूति और समाज के विकास की सोच सिखाई है। अश्विन ने अपने जवाब में यह भी कहा कि असली नेतृत्व वही है जो लोगों के संघर्ष को समझे और समाज को आगे ले जाने का काम करे। उनका यह जवाब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और कई लोगों ने उनकी सोच की सराहना की।

राजनीति, पहचान और नई बहस

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राजनीति, जाति और सामाजिक पहचान जैसे मुद्दों पर बहस को जन्म दे दिया है। जहां एक ओर विजय की पार्टी की जीत को तमिलनाडु की राजनीति में बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अश्विन का बयान यह दर्शाता है कि सार्वजनिक जीवन में पहचान और विचारधारा को लेकर किस तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं। फिलहाल, यह मामला सिर्फ एक सोशल मीडिया विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह इस बात की ओर इशारा करता है कि समाज में बदलाव के साथ-साथ सोच में भी बदलाव की जरूरत है।

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