5 साल का रिश्ता, रोका भी हुआ… फिर रेप का आरोप! दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले ने सबको चौंकाया

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम मामले की सुनवाई के दौरान रिश्तों और सहमति को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि प्रेम संबंधों में बने शारीरिक संबंध हर बार केवल शादी के वादे पर आधारित नहीं होते। कोर्ट ने यह टिप्पणी उस समय की जब भारतीय सेना में कार्यरत एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई चल रही थी। आरोपी पर आरोप था कि उसने शादी का झांसा देकर महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाए। हालांकि अदालत ने रिकॉर्ड में मौजूद तथ्यों को देखते हुए पाया कि दोनों के बीच लंबे समय तक रिश्ता रहा था और दोनों परिवारों की सहमति से रोका जैसी रस्म भी पूरी की गई थी। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में पूरी परिस्थितियों को समझना जरूरी होता है और हर मामले को अलग नजरिए से देखना चाहिए।

पांच साल तक चला रिश्ता, परिवारों की मौजूदगी में हुआ रोका

अदालत के सामने पेश दस्तावेजों के अनुसार आरोपी और शिकायतकर्ता महिला के बीच लगभग पांच वर्षों तक संबंध रहे। इस दौरान दोनों के बीच करीब दो साल तक शारीरिक संबंध भी बने। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि दोनों परिवारों की सहमति से रोका समारोह भी आयोजित किया गया था और शादी की तारीख तय करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी। अदालत ने कहा कि इन तथ्यों से यह संकेत मिलता है कि उस समय दोनों पक्षों के बीच विवाह की मंशा मौजूद थी। इसके अलावा अदालत ने यह भी कहा कि महिला द्वारा आरोपी के साथ निजी बातचीत में प्रेम संबंध स्वीकार करने की बात भी सामने आई है। इन सभी पहलुओं को देखते हुए कोर्ट ने माना कि यह संभव है कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से बने हों, न कि केवल शादी के वादे के आधार पर।

महिला ने लगाए गंभीर आरोप, दहेज मांगने का भी दावा

हालांकि इस मामले में महिला ने आरोपी के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि जब दोनों के बीच शादी की बात आगे बढ़ रही थी, तब आरोपी और उसकी बहन ने कथित रूप से 10 लाख रुपये दहेज की मांग की। महिला का आरोप है कि जब उसने इस मांग को मानने से इनकार किया तो आरोपी ने शादी से पीछे हटने की कोशिश की। इसके बाद उसे पता चला कि आरोपी कहीं और शादी करने की तैयारी कर रहा है। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उसकी निजी तस्वीरें और वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी दी और उसके साथ मारपीट भी की। इन आरोपों के आधार पर महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और कहा कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ संबंध बनाए।

फिलहाल आरोपी को मिली अग्रिम जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले के सभी पहलुओं पर विचार करते हुए कहा कि शुरुआती पुलिस शिकायत में रेप का आरोप शामिल नहीं था। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को अग्रिम जमानत देने का फैसला सुनाया। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि आरोपी जांच में पूरी तरह सहयोग करेगा और जरूरत पड़ने पर पुलिस के सामने पेश होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले की पूरी सच्चाई और अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान तय होगा। फिलहाल अदालत ने यह भी कहा कि रिश्तों से जुड़े ऐसे मामलों में जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना सही नहीं होता और सभी तथ्यों की जांच जरूरी है।

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