पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण ने जहां रिकॉर्ड तोड़ मतदान के साथ नया इतिहास रचा, वहीं इसी बीच सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। चुनाव आयोग के मुताबिक 23 अप्रैल को हुए पहले चरण में 91.78 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया, जिसे अब तक के सबसे बड़े मतदान प्रतिशतों में गिना जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इसे आजादी के बाद का सबसे उल्लेखनीय मतदान बताया। जनता के उत्साह और भारी भागीदारी के बीच राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं। लेकिन इसी दौरान एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने चुनावी माहौल को और भी दिलचस्प बना दिया है।
हुमायूं कबीर को बड़ा झटका
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व नेता और आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर के लिए चुनाव के बीच बड़ा झटका लगा है। हाल ही में मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद निर्माण को लेकर बयान देकर चर्चा में आए कबीर की पार्टी के एक उम्मीदवार ने अचानक पाला बदल लिया। मेतियाबुरुज विधानसभा सीट से AJUP के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अजाज अहमद अंसारी ने चुनाव के बीच ही TMC का दामन थाम लिया। यह कदम कबीर के लिए न सिर्फ राजनीतिक बल्कि संगठनात्मक स्तर पर भी बड़ा नुकसान माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनकी पार्टी की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।
अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में शामिल हुए अंसारी
गुरुवार को एक चुनावी सभा के दौरान अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में अजाज अहमद अंसारी ने आधिकारिक रूप से तृणमूल कांग्रेस जॉइन कर ली। इस दौरान मंच पर अंसारी को पार्टी का झंडा सौंपा गया और दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाकर स्वागत किया। TMC ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया, जिसमें पार्टी ने अंसारी के फैसले को “विकास की राजनीति को चुनना” बताया। पार्टी ने अपने बयान में कहा कि विभाजनकारी राजनीति को छोड़कर विकास की राह अपनाने वाले हर नेता का स्वागत है। इस संदेश के जरिए TMC ने साफ तौर पर विपक्षी दलों पर निशाना साधने की कोशिश की है।
चुनावी समीकरण पर क्या पड़ेगा असर?
अजाज अहमद अंसारी के इस फैसले से मेतियाबुरुज सीट समेत आसपास के क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के बीच इस तरह का पाला बदलना मतदाताओं के रुझान को प्रभावित कर सकता है। खासकर तब, जब कोई उम्मीदवार सीधे मैदान छोड़कर सत्ताधारी दल में शामिल हो जाए। दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस इसे अपनी रणनीतिक जीत के रूप में देख रही है, जबकि AJUP के लिए यह बड़ा झटका है। अब नजर इस बात पर होगी कि हुमायूं कबीर इस स्थिति से कैसे निपटते हैं और क्या वे अपनी पार्टी को संभाल पाते हैं या नहीं। कुल मिलाकर, बंगाल चुनाव 2026 का यह घटनाक्रम आने वाले चरणों में और भी दिलचस्प मोड़ ला सकता है।
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