भारत के स्वदेशी फाइटर जेट कार्यक्रम LCA तेजस Mk1A को लेकर बड़ी चिंता सामने आई है। दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भारतीय वायुसेना को एक भी विमान डिलीवर नहीं कर सका है। अब इस देरी को गंभीर मानते हुए रक्षा मंत्रालय कंपनी पर जुर्माना लगाने की तैयारी कर रहा है। यह मामला देश के डिफेंस मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि तेजस Mk1A वायुसेना की भविष्य की ताकत का अहम हिस्सा है।
इंजन सप्लाई में अटका पूरा प्रोजेक्ट, अमेरिका से जुड़ा है पेच
HAL ने देरी का मुख्य कारण इंजन की सप्लाई को बताया है। कंपनी के अनुसार, अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) से मिलने वाला F404-IN20 इंजन समय पर उपलब्ध नहीं हो पाया, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ। जानकारी के मुताबिक, 2021 में 99 इंजनों की डील हुई थी, लेकिन अप्रैल 2026 तक सिर्फ 6 इंजन ही भारत पहुंचे हैं। इसी वजह से कई विमान तैयार होने के बावजूद उड़ान के लिए पूरी तरह सक्षम नहीं हो पाए हैं। इस सप्लाई डिले ने पूरे प्रोजेक्ट की टाइमलाइन को बिगाड़ दिया है।
20 से ज्यादा एयरफ्रेम तैयार, लेकिन इंजन के बिना खड़े विमान
HAL के पास इस समय करीब 20 तेजस Mk1A एयरफ्रेम पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन इनमें इंजन नहीं लगे हैं। इसके अलावा 9 विमान ऐसे हैं जिनकी टेस्टिंग हो चुकी है, लेकिन वे भी अभी अंतिम इंजन के इंतजार में हैं। कंपनी का कहना है कि कुछ विमानों में टेस्ट इंजन लगाए गए थे, जिन्हें बाद में बदलकर GE के फाइनल इंजन लगाए जाने हैं। इस वजह से तैयार विमान फैक्ट्री में खड़े हैं और वायुसेना को औपचारिक रूप से सौंपे नहीं जा सके हैं।
वायुसेना की योजनाओं पर असर, आधुनिकीकरण में देरी
तेजस Mk1A भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण और नई स्क्वाड्रन बनाने की योजना का अहम हिस्सा है। इन विमानों की देरी से पुराने लड़ाकू विमानों को बदलने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। 2021 में सरकार और HAL के बीच 83 तेजस Mk1A विमानों की डील हुई थी, जिसकी कीमत करीब 45,696 करोड़ रुपये है। समझौते के अनुसार डिलीवरी फरवरी 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन अब तक एक भी विमान नहीं मिल पाया है। इस स्थिति को लेकर अब सरकार और वायुसेना दोनों की चिंता बढ़ गई है और सभी की नजर आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
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