देश का भविष्य कहे जाने वाले युवा इस समय सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के पेपर लीक मामले ने पूरे देश में एक नई बहस और विवाद को जन्म दे दिया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में छात्र विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। मानसून सत्र के दौरान जब संसद में देश के बड़े मुद्दों पर चर्चा की तैयारी चल रही थी, ठीक उसी समय संसद भवन के बाहर छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा। जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और हल्का लाठीचार्ज भी करना पड़ा।
इस्तीफे की मांग और CJP का आक्रामक रुख
NEET धांधली के बाद से ही छात्रों का गुस्सा अपने चरम पर है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हो रहे इस प्रदर्शन की सबसे प्रमुख मांग देश के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। प्रदर्शन कर रहे युवाओं का साफ़ कहना है कि लाखों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और जब तक शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। दिल्ली के अलावा जयपुर, सीकर, बेंगलुरु और रायपुर जैसे प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों पर भी छात्र संगठन लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) की कार्यप्रणाली पर उठते सवालों के बीच CJP का यह नया और आक्रामक रूप पूरे मामले को एक बड़े राजनीतिक मोड़ की ओर ले जाता दिख रहा है।
विवेक ओबेरॉय का चौंकाने वाला बयान और लोकतंत्र पर राय
जहाँ एक तरफ CJP और देश का युवा वर्ग सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है, वहीं दूसरी तरफ इस पूरे मामले में बॉलीवुड अभिनेता विवेक ओबेरॉय का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जब विवेक ओबेरॉय से एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान CJP और इस पूरे राजनीतिक उथल-पुथल के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही सहज और बेबाक अंदाज़ में जवाब दिया। विवेक ओबेरॉय ने साफ़ तौर पर कहा, “मैं एक अभिनेता हूँ, कोई राजनेता नहीं। इसलिए मैं राजनीतिक दांव-पेंच और मुद्दों पर ज़्यादा ध्यान नहीं देता। हम तो बस ज़िंदगी में चीज़ों को देखते हैं, ऑब्जर्व करते हैं और सीखते हैं।” इसके साथ ही उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए जोड़ा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र (Healthy Democracy) की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि उसमें हर आवाज़ को जगह मिलती है। अगर लोग अपनी बात रख रहे हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
विवादों के बीच विवेक का बड़ा दांव और ‘रामायण’ का इंतज़ार
अपनी बेबाकी और स्पष्ट विचारों के लिए पहचाने जाने वाले विवेक ओबेरॉय का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वह खुद एक बहुत बड़े बजट प्रोजेक्ट को लेकर सुर्खियों में हैं। विवेक बहुत जल्द नितेश तिवारी की महत्वाकांक्षी और भव्य फिल्म ‘रामायण’ में नज़र आने वाले हैं। लगभग 4 हजार करोड़ के विशाल बजट में बन रही इस दो-भागों की महाकाल्पनिक फिल्म में विवेक ओबेरॉय लंकापति रावण के सेनापति और बहनोई ‘विद्युतजिह्व’ का दमदार किरदार निभाते हुए दिखाई देंगे। इस मेगा-बजट फिल्म का पहला भाग दिवाली 2026 के खास मौके पर बड़े पर्दे पर रिलीज़ होने के लिए पूरी तरह तैयार है। एक तरफ जहाँ विवेक अपनी एक्टिंग की नई पारी की तैयारियों में व्यस्त हैं, वहीं उनके इस तटस्थ और समझदारी भरे बयान ने यह साबित कर दिया है कि वे देश के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों से भली-भांति वाकिफ हैं, भले ही वे खुद को राजनीति से दूर रखते हों।






