Iran US News: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। Donald Trump ने दावा किया है कि Strait of Hormuz से गुजर रहे अमेरिकी नौसेना के तीन युद्धपोतों पर हमला किया गया। हालांकि अमेरिका के मुताबिक इन जहाजों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन जवाबी कार्रवाई में हमलावरों को भारी क्षति पहुंचाई गई। दूसरी ओर Iran ने अमेरिका पर ही संघर्ष विराम तोड़ने और उसके जहाजों व तटीय इलाकों पर हमले का आरोप लगाया है। दोनों देशों के अलग-अलग दावों के बीच सच्चाई क्या है, यह साफ नहीं हो पाया है, लेकिन इतना तय है कि हालात फिर से विस्फोटक दिशा में बढ़ रहे हैं।
ट्रंप की सख्त चेतावनी और ‘डील’ का दबाव
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी नौसेना के अत्याधुनिक डेस्ट्रॉयर बिना किसी नुकसान के हॉर्मुज से गुजर गए और हमलावरों को कड़ा जवाब दिया गया। उन्होंने ईरान को सीधे चेतावनी देते हुए कहा कि अगर तेहरान जल्द समझौते (डील) पर हस्ताक्षर नहीं करता है, तो अमेरिका की अगली कार्रवाई और ज्यादा “कठोर और हिंसक” हो सकती है। ट्रंप का यह बयान केवल सैन्य चेतावनी नहीं, बल्कि कूटनीतिक दबाव की रणनीति भी माना जा रहा है। अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंतित है और इस डील के जरिए वह क्षेत्र में स्थिरता लाना चाहता है, लेकिन ईरान की शर्तें और अमेरिका की अपेक्षाएं अब तक एक-दूसरे से मेल नहीं खा पा रही हैं।
संघर्ष विराम के बाद फिर क्यों भड़की आग
यह ताजा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब 8 अप्रैल से लागू संघर्ष विराम के बाद हालात कुछ शांत नजर आ रहे थे। इससे पहले कई हफ्तों तक अमेरिका और Israel द्वारा ईरान पर हमले किए गए थे, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव में सीजफायर लागू हुआ था। लेकिन अब ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने इस संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए उसके तेल टैंकर और अन्य जहाजों को निशाना बनाया। ईरान ने यह भी दावा किया कि उसके Qeshm Island और तटीय क्षेत्रों—बंदर खमीर व सीरिक—पर हवाई हमले किए गए। जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य जहाजों को निशाना बनाने की बात कही है। इन आरोप-प्रत्यारोपों ने पूरे क्षेत्र को फिर से अस्थिर बना दिया है।
क्या बढ़ेगा बड़ा युद्ध खतरा
हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई गुजरती है, वहां किसी भी सैन्य टकराव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियां केवल द्विपक्षीय विवाद नहीं रह गई हैं, बल्कि यह पूरे पश्चिम एशिया के लिए खतरा बन सकती हैं। अगर दोनों देशों के बीच जल्द ही कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह तनाव बड़े सैन्य संघर्ष में बदल सकता है। फिलहाल वॉशिंगटन ईरान से अपने प्रस्ताव पर जवाब का इंतजार कर रहा है, लेकिन जमीनी हालात को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि बातचीत का रास्ता खुलेगा या टकराव और गहराएगा।
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