समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव गुरुवार को कोलकाता पहुंचे, जहां उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। इस दौरान तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी भी मौजूद रहे, जिन्होंने अखिलेश यादव का गर्मजोशी से स्वागत किया। मुलाकात के दौरान अखिलेश ने ममता बनर्जी से कहा, “दीदी, आप हारी नहीं हैं,” जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। इस बयान को सिर्फ एक औपचारिक टिप्पणी नहीं, बल्कि विपक्षी एकजुटता के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
एयरपोर्ट पर बीजेपी पर सीधा हमला
कोलकाता पहुंचने के बाद अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया और लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश हुई है। उनके मुताबिक, पश्चिम बंगाल में मतदान तो हुआ, लेकिन कई जगहों पर लोगों ने अपनी इच्छा से कम और दबाव में ज्यादा वोट डाला। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक ताकतें महिलाओं के नेतृत्व को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं, और यही कारण है कि ममता बनर्जी उनके निशाने पर रहती हैं। अखिलेश ने चुनावी संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि निष्पक्षता बनाए रखने वाली संस्थाओं की विश्वसनीयता पर असर पड़ा है।
माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी ने कोलकाता में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी जी एवं टीएमसी सांसद श्री अभिषेक बनर्जी जी से मुलाक़ात की। pic.twitter.com/IZbXtmGpZV
— Samajwadi Party (@samajwadiparty) May 7, 2026
चुनाव नतीजों के बाद बढ़ी सियासी हलचल
हाल ही में आए चुनाव परिणामों में भाजपा ने भारी बहुमत हासिल किया है, जबकि ममता बनर्जी की पार्टी को अपेक्षा से कम सीटें मिली हैं। इसके बावजूद ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है और अपने फैसले पर कायम हैं। चुनाव के बाद राज्य के कई हिस्सों में तनाव और हिंसा की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया है। इस बीच विपक्षी नेताओं की गतिविधियां तेज हो गई हैं, और अखिलेश यादव की यह मुलाकात उसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है।
विपक्षी एकता की ओर इशारा?
यह मुलाकात सिर्फ शिष्टाचार भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा संदेश छिपा हो सकता है। अखिलेश यादव का ममता बनर्जी के समर्थन में खुलकर बोलना विपक्षी दलों के बीच संभावित तालमेल की ओर इशारा करता है। खासकर ऐसे समय में जब चुनावी नतीजों के बाद सियासी समीकरण बदल रहे हैं, यह मुलाकात आने वाले दिनों में नई रणनीति की शुरुआत हो सकती है। फिलहाल दोनों नेताओं की इस बैठक ने राजनीति में हलचल जरूर बढ़ा दी है और आगे के घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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