क्या सच में थम गई अमेरिका-ईरान जंग? ट्रंप की चिट्ठी ने खोली सच्चाई या छिपा है कोई बड़ा खेल!

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को लेकर एक नया मोड़ सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संसद के नेताओं को लिखी चिट्ठी में कहा है कि दोनों देशों के बीच अब कोई सक्रिय सैन्य टकराव नहीं चल रहा है। उनके अनुसार, 7 अप्रैल 2026 के बाद से किसी भी तरह की गोलीबारी नहीं हुई है और 28 फरवरी से शुरू हुई शत्रुता अब समाप्त मानी जा सकती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में यह बहस तेज थी कि क्या राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई के लिए संसद की मंजूरी लेनी चाहिए थी। ट्रंप ने अपने पत्र के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि अब हालात नियंत्रण में हैं।

कानून की समयसीमा से बचने की रणनीति?

इस मामले में 1973 का War Powers Resolution भी चर्चा का विषय बना हुआ है। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को किसी भी सैन्य कार्रवाई के 60 दिनों के भीतर उसे खत्म करना होता है या फिर कांग्रेस से अनुमति लेनी होती है। ट्रंप प्रशासन ने मार्च की शुरुआत में इस कार्रवाई की जानकारी दी थी, जिससे तय समयसीमा 1 मई तक पूरी हो रही थी। लेकिन ट्रंप का कहना है कि चूंकि अब युद्ध जैसी स्थिति खत्म हो चुकी है, इसलिए इस नियम का पालन करने की जरूरत नहीं है। उनके इस बयान ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में नई बहस छेड़ दी है कि क्या वास्तव में हालात सामान्य हो चुके हैं या यह सिर्फ एक रणनीतिक बयान है।

 ईरान की ताकत पर बड़ा दावा

ट्रंप ने अपनी चिट्ठी में ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर भी बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि हालिया संघर्ष के बाद ईरान की ताकत काफी कमजोर हो गई है और उसकी रक्षा व्यवस्था पहले जैसी मजबूत नहीं रही। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे यह साफ होता है कि अमेरिका अपनी कार्रवाई को सफल बताने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के अंदर नेतृत्व को लेकर मतभेद हैं, जिससे बातचीत की प्रक्रिया जटिल हो रही है। उनके मुताबिक, वहां के नेता एक राय पर नहीं हैं और यही वजह है कि किसी ठोस समझौते तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।

शांति की बात भी, लेकिन खतरा अभी टला नहीं

हालांकि ट्रंप ने यह कहा है कि फिलहाल हालात शांत हैं, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि भविष्य को लेकर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कूटनीतिक बातचीत को प्राथमिकता देने की बात कही, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया कि अगर बातचीत सफल नहीं होती है, तो सैन्य कार्रवाई का रास्ता फिर से अपनाया जा सकता है। उनके बयान से यह साफ है कि अमेरिका दोनों विकल्प खुले रखना चाहता है। ऐसे में भले ही अभी स्थिति शांत दिखाई दे रही हो, लेकिन आने वाले समय में हालात फिर से तनावपूर्ण हो सकते हैं।

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