Friday, February 27, 2026

पॉक्सो केस में फंसे शंकराचार्य, बोले– “जिसे जानते नहीं, उसका आरोप कैसे?”

नाबालिग से यौन शोषण के आरोपों का सामना कर रहे Swami Avimukteshwaranand Saraswati ने अग्रिम जमानत पर सुनवाई से ठीक पहले बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, “जो बच्चा हमारे पास कभी आया ही नहीं, उसके साथ हमारे नाम को जोड़ना सरल नहीं है।” उनका कहना है कि जिन बच्चों का जिक्र किया जा रहा है, वे कभी उनके गुरुकुल में दाखिल नहीं हुए। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि वे माघ मेले के दौरान लगातार सार्वजनिक कार्यक्रमों में रहे और वहां सीसीटीवी व मीडिया कैमरों की मौजूदगी थी। ऐसे में आरोपों को वे निराधार और साजिश करार दे रहे हैं। उनका दावा है कि सच्चाई सामने आएगी और अदालत में तथ्य स्पष्ट होंगे।

पुलिस पर सवाल

अविमुक्तेश्वरानंद ने बयान में यह भी कहा कि जिन बच्चों का जिक्र हो रहा है, वे कथित तौर पर किसी और की कस्टडी में हैं और पुलिस को इस पहलू पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि बच्चों को जुवेनाइल बोर्ड के समक्ष क्यों नहीं पेश किया गया और जांच में देरी क्यों हो रही है। उनके अनुसार, अगर किसी के पास कोई डिजिटल सबूत या दस्तावेज है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। हालांकि पुलिस ने आधिकारिक रूप से कहा है कि जांच कानून के अनुसार की जा रही है और मेडिकल रिपोर्ट अदालत में पेश की जाएगी। मामला पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज है, इसलिए जांच की प्रक्रिया संवेदनशील है और गोपनीयता बरती जा रही है। इस बीच दोनों पक्षों के दावों ने मामले को और जटिल बना दिया है।

प्रयागराज में दर्ज मुकदमा

यह मुकदमा 21 फरवरी को प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप है कि पिछले वर्ष धार्मिक आयोजनों और गुरुकुल से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान दो नाबालिगों के साथ दुष्कर्म हुआ। इस मामले में अविमुक्तेश्वरानंद के साथ उनके शिष्य और कुछ अज्ञात लोगों के नाम भी शामिल हैं। अब अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई Allahabad High Court में होनी है। पुलिस ने दोनों नाबालिगों की मेडिकल जांच कराई है और रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखी जाएगी। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत प्राथमिक तौर पर यह देखेगी कि आरोपी जांच में सहयोग कर रहे हैं या नहीं और गिरफ्तारी की जरूरत है या नहीं। सुनवाई का नतीजा आगे की कानूनी दिशा तय कर सकता है।

पलटवार की तैयारी, धारा 22 के तहत दायर किया वाद

शंकराचार्य ने कहा है कि उन्होंने शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्ति के खिलाफ भी पॉक्सो अदालत में वाद दायर किया है। उनका तर्क है कि यदि कोई झूठा मुकदमा करता है तो कानून में उसके खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम की धारा 22 का उल्लेख करते हुए कहा कि फर्जी आरोप साबित होने पर शिकायतकर्ता के खिलाफ मामला चल सकता है। समर्थकों का कहना है कि यह धार्मिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है, जबकि विरोधी पक्ष निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। फिलहाल पूरे मामले की नजर अदालत की सुनवाई और पुलिस जांच पर टिकी है। यह प्रकरण केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक चर्चा का विषय भी बन गया है। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला और जांच की प्रगति इस सस्पेंस को साफ करेगी कि आरोपों में कितना दम है और किस दिशा में मामला आगे बढ़ेगा।

Read More-लाल बारादरी के बंद दरवाजों के पीछे क्या है सच्चाई? नमाज विवाद पर लखनऊ यूनिवर्सिटी में हिंदू-मुस्लिम छात्र एक साथ उतरे सड़क पर

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img