कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG 2026) के दौरान कई परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी समस्याएं सामने आने के बाद देशभर में चर्चा तेज हो गई है। निर्धारित समय पर परीक्षा शुरू न होने से कई छात्रों और अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि बाद में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए परीक्षा प्रक्रिया को आगे बढ़ाया और प्रभावित छात्रों को पूरा समय देने की बात कही। लेकिन इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रबंधन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षा में आई इस देरी को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है और विपक्ष सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। लाखों छात्रों से जुड़ी इस परीक्षा में हुई गड़बड़ी ने शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हाल के वर्षों में कई बड़ी परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आए हैं और इससे छात्रों का भरोसा प्रभावित हुआ है। राहुल गांधी ने NEET, CBSE, SSC और CUET जैसी परीक्षाओं का उल्लेख करते हुए शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार पर युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाया और कहा कि देश के करोड़ों छात्र निष्पक्ष और व्यवस्थित परीक्षा प्रणाली की उम्मीद करते हैं। उनके बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया। विपक्षी दलों ने भी परीक्षा प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है, जबकि सत्तापक्ष इस मुद्दे पर एजेंसियों द्वारा उठाए गए सुधारात्मक कदमों का हवाला दे रहा है।
NTA ने बताई देरी की वजह
परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था NTA ने स्पष्ट किया कि कुछ परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी समस्या आने के कारण परीक्षा निर्धारित समय से शुरू नहीं हो सकी थी। एजेंसी के अनुसार, समस्या का समाधान जल्द कर लिया गया और यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी छात्र का नुकसान न हो। NTA ने कहा कि प्रभावित केंद्रों पर छात्रों को पूरा परीक्षा समय उपलब्ध कराया गया ताकि वे बिना किसी दबाव के अपना पेपर पूरा कर सकें। इसके साथ ही एजेंसी ने छात्रों और अभिभावकों को हुई असुविधा के लिए खेद भी व्यक्त किया। सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर और ईमेल सुविधा भी जारी की गई। अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी परीक्षा में तकनीकी चुनौतियां कभी-कभी सामने आ सकती हैं, लेकिन उनका उद्देश्य हर अभ्यर्थी को निष्पक्ष अवसर देना है। एजेंसी अब भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए अतिरिक्त उपायों पर भी काम कर रही है।
लाखों छात्रों की परीक्षा, इसलिए बढ़ी चिंता
CUET-UG देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक है, जिसके माध्यम से विभिन्न केंद्रीय और अन्य विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं, इसलिए किसी भी तरह की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या का असर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों पर पड़ता है। इस वर्ष परीक्षा 11 मई से शुरू होकर 31 मई तक विभिन्न चरणों और शिफ्टों में आयोजित की जा रही है। अलग-अलग विषयों और बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के कारण इसका संचालन काफी व्यापक स्तर पर किया जाता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल परीक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि छात्रों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। फिलहाल परीक्षा में हुई देरी को लेकर बहस जारी है और सभी की नजर इस बात पर है कि भविष्य में ऐसी समस्याओं को रोकने के लिए क्या नए कदम उठाए जाते हैं।







