उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से कानून व्यवस्था और जनता की सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और सकारात्मक खबर सामने आ रही है। शहर के एक नामचीन होटल में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) संजीव त्यागी खुद जनता के बीच एक बेहद खास मिशन को लेकर पहुंच गए। दरअसल, मौका था ‘कम्युनिटी पुलिसिंग’ (सामुदायिक पुलिस व्यवस्था) को लेकर आयोजित एक महा-जनसंवाद का। आम तौर पर पुलिस थानों और चौकियों के बंद कमरों में दिखने वाली खाकी इस बार सीधे जनता के रूबरू थी। डीआईजी संजीव त्यागी ने इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक में उपस्थित नागरिकों, प्रबुद्ध जनों, महिलाओं और स्थानीय व्यापारियों से सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि समाज से अपराध का खात्मा तब तक मुमकिन नहीं है, जब तक पुलिस और जनता एक दूसरे के पूरक बनकर काम न करें। पुलिस का यह बदला हुआ दोस्ताना रवैया देखकर वहां मौजूद हर शख्स दंग रह गया। इस जनचौपाल का मुख्य उद्देश्य जनता के मन से पुलिस का खौफ निकालना और अपराधियों के मन में कानून का डर पैदा करना था।
बंद कमरे में अवाम ने खोले दिल के राज
इस हाई-प्रोफाइल जनचौपाल की सबसे खास बात यह रही कि डीआईजी संजीव त्यागी ने किसी पारंपरिक अधिकारी की तरह केवल भाषण नहीं दिया, बल्कि उन्होंने खुद आगे बढ़कर लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं, सुझावों और उनकी उम्मीदों को बेहद गंभीरता के साथ डायरी में नोट किया। बैठक में मौजूद महिला संगठनों, व्यापार मंडल के पदाधिकारियों और आम नागरिकों ने स्थानीय स्तर पर होने वाली रोजमर्रा की दिक्कतों, ट्रैफिक की समस्याओं और मोहल्लों में रात के समय गश्त बढ़ाने जैसे कई अहम सुझाव दिए। डीआईजी ने सभी की बातों को बहुत संजीदगी से सुना और भरोसा दिलाया कि जनता की हर एक अपेक्षा पर पुलिस प्रशासन पूरी तरह खरा उतरेगा। क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सुदृढ़ कानून व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में घंटों तक विस्तार से चर्चा की गई। पुलिस और जनता के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने का यह जो नया फॉर्मूला तैयार किया गया है, उसने स्थानीय लोगों में एक नया भरोसा जगा दिया है।
साइबर ठगों और नशे के सौदागरों पर वार
आज का दौर तकनीक का है, लेकिन इस तकनीक के साथ अपराध के तरीके भी बदल गए हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान डीआईजी संजीव त्यागी ने समाज में फैल रहे डिजिटल कैंसर यानी साइबर अपराध (Cyber Crime) को लेकर लोगों को जमकर जागरूक किया। उन्होंने इंटरनेट मीडिया (सोशल मीडिया) के दुरुपयोग से होने वाले नुकसानों के बारे में बताते हुए युवाओं और अभिभावकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी। इसके साथ ही, जिले में पैर पसार रहे नशाखोरी के खिलाफ बिगुल फूंकते हुए उन्होंने ‘नशा उन्मूलन’ पर समाज का सहयोग मांगा। कार्यक्रम में महिला सुरक्षा और बाल संरक्षण को लेकर एक अभेद्य चक्रव्यूह तैयार करने पर बात हुई। डीआईजी ने वहां मौजूद सभी लोगों से एक बेहद भावुक और कड़क अपील करते हुए कहा कि आपके आसपास कोई भी संदिग्ध गतिविधि हो या कोई भी अपराधी सिर उठाने की कोशिश करे, तो बिना डरे इसकी तत्काल सूचना सीधे पुलिस को दें। आपकी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी और अपराधी पर ऐसा एक्शन होगा जो मिसाल बनेगा।
कप्तानों की चौखड़ी को डीआईजी का सीधा अल्टीमेटम
कार्यक्रम का अंत होते-होते माहौल तब और गंभीर हो गया जब डीआईजी ने अपने ही मातहतों की क्लास लगा दी। उन्होंने कम्युनिटी पुलिस यूनिट (CPU) के प्रभारी को दो टूक शब्दों में कड़े निर्देश जारी किए। डीआईजी ने कहा कि सीपीयू टीम का काम केवल सड़कों पर घूमना नहीं है, बल्कि उन्हें लगातार अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण करना होगा। विशेष रूप से समाज के बुजुर्गों, असहाय महिलाओं और विकलांग व्यक्तियों के घर जाकर उनसे जनसंवाद करना होगा और उनकी छोटी से छोटी समस्या का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करना होगा। सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मिशन शक्ति अभियान’ और ‘बहू-बेटी सम्मेलन’ जैसे कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर सहयोग करने और समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी महिला तक सुरक्षा का भरोसा पहुंचाने की अपील की गई। इस पूरे शानदार और अनुशासित कार्यक्रम का मंच संचालन सीओ सिटी सत्येन्द्र भूषण तिवारी ने अपनी खास और धारदार शैली में किया। इस अहम मौके पर खाकी का पूरा मजबूत अमला मुस्तैद दिखा, जिसमें शहर कोतवाल मोतीचंद राजभर, एसएचओ पुरानी बस्ती शशांक शेखर राय और थानेदार वालटरगंज सूर्यप्रकाश सिंह समेत भारी संख्या में पुलिस बल के जवान और शहर के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।








