पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव के संसद परिसर में भगवा वेशभूषा पहनकर किए गए विरोध प्रदर्शन को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार को लखनऊ के गोमतीनगर स्थित विश्व हिंदू रक्षा परिषद के कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में संगठन के कार्यकर्ता जुटे और पप्पू यादव के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए उनका पुतला भी फूंका। संगठन का आरोप है कि सांसद की इस हरकत से सनातन परंपरा और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। कुछ समय के लिए प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की बहस भी हुई, लेकिन स्थिति नियंत्रण में रही। पूरे घटनाक्रम के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
संगठनों ने जताई नाराजगी, कार्रवाई की उठाई मांग
विश्व हिंदू रक्षा परिषद के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि संसद जैसे संवैधानिक मंच पर धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक इस्तेमाल उचित नहीं माना जा सकता। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय ने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियों से करोड़ों लोगों की आस्था प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को विरोध दर्ज कराना है तो उसके लिए लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके मौजूद हैं। प्रदर्शन के दौरान संगठन ने सरकार और संसद से इस मामले को गंभीरता से लेने की मांग भी की। वहीं, इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग सामाजिक संगठनों ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं और पूरे मामले पर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
हिंदू सेना ने लोकसभा अध्यक्ष को भेजा पत्र
इस विवाद के बीच हिंदू सेना ने भी मोर्चा खोल दिया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर सांसद पप्पू यादव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि संसद परिसर में भगवा वस्त्र पहनकर किए गए विरोध प्रदर्शन से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और संसद की गरिमा पर भी सवाल खड़े हुए हैं। संगठन का कहना है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि का आचरण संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है तो उसके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। हिंदू सेना ने यह भी मांग की है कि मामले की जांच कर आवश्यक संवैधानिक कदम उठाए जाएं। हालांकि, इस पूरे विवाद पर संबंधित पक्ष की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना बनी हुई है।
राजनीतिक बहस तेज, आगे क्या होगा इस पर सबकी नजर
पप्पू यादव से जुड़े इस विवाद ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर कई संगठन इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बता रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ लोग इसे राजनीतिक विरोध का हिस्सा मान रहे हैं। फिलहाल लोकसभा अध्यक्ष या संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि शिकायतों और मांगों पर आगे क्या कार्रवाई होती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक चर्चा में रह सकता है। वहीं प्रशासन ने अपील की है कि सभी पक्ष कानून का पालन करें और किसी भी तरह की प्रतिक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से व्यक्त करें।
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