‘उनके हिसाब से सारे हिंदु चोर हैं?… ओवैसी के बयान पर स्पीकर सतीश महाना ने उठाए बड़े सवाल

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर माहौल गर्म हो गया है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के राम मंदिर से जुड़े बयान पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। दोनों नेताओं के बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है। विधानसभा के मानसून सत्र के बीच यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया। सतीश महाना ने कहा कि ओवैसी की टिप्पणी किसी एक व्यक्ति या संस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे हिंदू समाज पर सवाल खड़े किए गए हैं। वहीं, ओवैसी ने अपने बयान का बचाव करते हुए विधानसभा अध्यक्ष के पुराने बयान पर आपत्ति जताई और इसे संवैधानिक पद की गरिमा से जोड़ दिया। इस पूरे विवाद के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

स्पीकर सतीश महाना ने क्या कहा?

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि जिस तरह की टिप्पणी की गई है, उससे पूरे हिंदू समाज का अपमान होता है। उनका कहना था कि अगर कोई यह कहता है कि किसी विशेष समुदाय की मौजूदगी में चोरी नहीं होती, तो इसका सीधा मतलब यह निकलता है कि दूसरे समुदाय पर चोरी का आरोप लगाया जा रहा है। महाना ने कहा कि ऐसे बयान समाज में गलत संदेश देते हैं और लोगों की भावनाओं को आहत कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, जिससे किसी धर्म या समुदाय के लोगों को ठेस पहुंचे। उनके अनुसार, समाज को जोड़ने वाली भाषा का इस्तेमाल होना चाहिए, न कि ऐसी टिप्पणियां जो विवाद को बढ़ाएं।

ओवैसी ने भी रखा अपना पक्ष

इस विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब असदुद्दीन ओवैसी ने विधानसभा अध्यक्ष के एक पुराने बयान पर प्रतिक्रिया दी। ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या किसी घटना को चोरी कहना भी अब व्यक्ति के धर्म पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी गलत घटना की आलोचना करता है, तो उसकी धार्मिक पहचान को बीच में लाना उचित नहीं है। ओवैसी ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक और जनप्रतिनिधि को अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के उस बयान पर भी आपत्ति जताई जिसमें राम मंदिर को लेकर दान देने वालों से रसीद दिखाने की बात कही गई थी। ओवैसी का कहना था कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के बयान संतुलित और निष्पक्ष होने चाहिए ताकि किसी भी वर्ग में गलत संदेश न जाए।

मानसून सत्र में हंगामे के बीच बढ़ी सियासी तल्खी

यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र पहले से ही कई मुद्दों को लेकर हंगामेदार बना हुआ है। सदन में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच लगातार तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सत्र के दौरान कहा कि सभी विधायकों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन सदन की कार्यवाही बाधित करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने विपक्ष से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील भी की। दूसरी ओर, राजनीतिक दल इस बयानबाजी को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। फिलहाल दोनों नेताओं के बयानों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

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