राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने संसद के मॉनसून सत्र में लगातार हो रहे हंगामे को लेकर चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि पिछले करीब दो सप्ताह से संसद की कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल पा रही है। इसकी वजह से जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो रही और देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स का पैसा भी बिना किसी ठोस नतीजे के खर्च हो रहा है। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है, जहां देश के हर वर्ग की आवाज उठाई जाती है। ऐसे में यदि सदन बार-बार बाधित होगा तो इसका सीधा असर आम लोगों की समस्याओं के समाधान पर पड़ेगा। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से अपील की कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन संसद की गरिमा और जिम्मेदारी को भी समझना जरूरी है।
सांसद जनता की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करते हैं
स्वाति मालीवाल ने कहा कि देशभर से चुने गए सांसद लाखों लोगों की उम्मीदों और विश्वास का प्रतिनिधित्व करने संसद पहुंचते हैं। जनता उन्हें इसलिए चुनती है ताकि वे उनके क्षेत्र की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएं और सरकार से जवाब मांगें। उन्होंने कहा कि संसद केवल राजनीतिक बहस का मंच नहीं, बल्कि कानून बनाने और देश से जुड़े फैसले लेने की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है। यदि सांसद चर्चा के बजाय लगातार हंगामे में समय बिताएंगे तो कई जरूरी विधेयक, योजनाएं और जनहित के मुद्दे प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि संसद में हर सदस्य की जिम्मेदारी है कि वह अपनी बात पूरी मजबूती से रखे, लेकिन संसदीय नियमों और मर्यादा का पालन भी करे।
विरोध जरूरी है, लेकिन संसदीय प्रक्रिया भी उतनी ही अहम
राज्यसभा सांसद ने अपने संदेश में कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना और विरोध करना विपक्ष का अधिकार ही नहीं बल्कि उसकी जिम्मेदारी भी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि विरोध का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे संसद की कार्यवाही पूरी तरह ठप न हो। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल, ज़ीरो आवर, विशेष उल्लेख और विधेयकों पर चर्चा जैसे कई संसदीय मंच मौजूद हैं, जहां विपक्ष अपने सभी मुद्दों को मजबूती से रख सकता है। उनके मुताबिक यदि हर दिन नारेबाजी, टेबल थपथपाने और हंगामे की वजह से कार्यवाही रुकती रहेगी तो जनता के हितों पर असर पड़ेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि लगातार सदन नहीं चलने से आखिर फायदा किसे हो रहा है और नुकसान किसका हो रहा है। उनका मानना है कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संसद का काम रुकना किसी के हित में नहीं है।
सत्ता और विपक्ष दोनों से संसद की गरिमा बनाए रखने की अपील
स्वाति मालीवाल ने अपने संदेश के अंत में कहा कि पूरा देश संसद की कार्यवाही पर नजर रखता है। यही वह सदन है जहां देश के विकास, कानून और भविष्य से जुड़े बड़े फैसले लिए जाते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि देश के कई महान नेताओं ने इसी संसद में बैठकर भारत की प्रगति की मजबूत नींव रखी थी। इसलिए सभी राजनीतिक दलों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर संसद को सुचारु रूप से चलाने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने सत्ता पक्ष से विपक्ष की बात सुनने और विपक्ष से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। उनके अनुसार जनता चाहती है कि संसद में बहस हो, समाधान निकले और देश के विकास से जुड़े फैसले समय पर लिए जाएं। इसलिए सभी पक्षों को मिलकर सदन की गरिमा बनाए रखनी चाहिए।








