न BMW, न ऑडी… इस दूल्हे ने क्यों चुना ट्रैक्टर? बारात देखकर दुल्‍हन के प‍िता बोले- ‘मुझे दामाद पर…’

उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले से एक ऐसी शादी की तस्वीर सामने आई है, जिसने आधुनिक दिखावे की परंपरा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां आमतौर पर शादियों में महंगी और लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है, वहीं एक किसान दूल्हे ने अपनी बारात ट्रैक्टर से निकालकर अलग मिसाल पेश की। डलमऊ क्षेत्र के एक गांव में हुई इस शादी में दूल्हा महेंद्र कुमार खुद ट्रैक्टर चलाकर दुल्हन के घर पहुंचा। जैसे ही बारात गांव की सीमा में दाखिल हुई, लोगों की नजरें उसी पर टिक गईं। फूलों से सजे ट्रैक्टर पर बैठा दूल्हा पूरे आत्मविश्वास और गर्व के साथ आगे बढ़ रहा था, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया।

अपनी जड़ों से जुड़ाव की अनोखी मिसाल

महेंद्र कुमार का यह फैसला केवल एक अलग अंदाज नहीं था, बल्कि अपनी पहचान और जड़ों से जुड़ाव को दिखाने का तरीका भी था। किसान परिवार से आने वाले महेंद्र ने बताया कि उनके लिए खेती सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा उन्हें अपनी मिट्टी से जुड़े रहने की सीख दी थी। हाल ही में उनके परिवार में नया ट्रैक्टर आया था, जिसे उन्होंने अपनी बारात का हिस्सा बनाने का फैसला किया। उनका मानना है कि किसान के लिए ट्रैक्टर किसी लग्जरी गाड़ी से कम नहीं होता, बल्कि वही उसकी असली पहचान है।

दुल्हन पक्ष ने भी सराहा फैसला

इस अनोखी बारात को देखकर दुल्हन के परिवार और गांव के लोगों ने भी खुशी जताई। दुल्हन के पिता देवी प्रसाद प्रजापति ने कहा कि उन्हें अपने दामाद के इस फैसले पर गर्व है। उन्होंने बताया कि उनका परिवार भी खेती पर ही निर्भर है और वे सादगी में विश्वास रखते हैं। जब उन्होंने दूल्हे को ट्रैक्टर चलाकर आते देखा, तो उन्हें लगा कि यह सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि एक संदेश है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जहां लोग दिखावे के लिए कर्ज तक ले लेते हैं, वहां इस तरह की सोच समाज के लिए प्रेरणा देने वाली है। यह शादी सादगी और परंपरा का सुंदर उदाहरण बन गई।

सोशल मीडिया पर छाया ‘देसी स्वैग’

बारात के दौरान का यह दृश्य अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस ‘देसी स्टाइल’ की जमकर तारीफ कर रहे हैं और इसे एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे हैं। शादी में जहां एक तरफ पारंपरिक ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन पर बाराती नाच रहे थे, वहीं दूसरी ओर ट्रैक्टर पर सवार दूल्हा सबका ध्यान अपनी ओर खींच रहा था। आसपास के गांवों से भी लोग इस अनोखी बारात को देखने पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की शादियां समाज को यह संदेश देती हैं कि खुशी दिखावे में नहीं, बल्कि अपनी पहचान और मूल्यों को अपनाने में है। यह शादी आने वाले समय में कई लोगों के लिए प्रेरणा बन सकती है।

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