पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव तब देखने को मिला जब बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हुए भव्य समारोह के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन की औपचारिकता पूरी हो गई। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सोशल मीडिया अपडेट भी चर्चा का विषय बन गया। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) प्रोफाइल से “पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री” वाला उल्लेख हटा दिया है, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
बायो में बदलाव से उठे कई सवाल
ममता बनर्जी के एक्स बायो को लेकर पहले भी राजनीतिक चर्चा होती रही है, लेकिन इस बार मामला सत्ता परिवर्तन से सीधे जुड़ गया है। जानकारी के अनुसार, चुनाव परिणामों और नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने अपने प्रोफाइल में बदलाव किया। पहले उनके बायो में उन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बताया गया था, जिसे अब हटा दिया गया है। इस बदलाव के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोग इसे औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक संकेत के रूप में देख रहे हैं।
आरोपों के बीच बढ़ी सियासी गर्मी
विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही ममता बनर्जी लगातार चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि चुनाव के दौरान धांधली हुई और उनके खिलाफ साजिश रची गई। तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि कई स्तरों पर चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही। वहीं बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है। चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
ममता बनर्जी का राजनीतिक सफर
ममता बनर्जी भारतीय राजनीति की सबसे प्रभावशाली महिला नेताओं में से एक मानी जाती हैं। उनका जन्म 5 जनवरी 1955 को कोलकाता में हुआ था और वे एक साधारण परिवार से आती हैं। छात्र जीवन से ही उनकी रुचि राजनीति में रही, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। धीरे-धीरे उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और बाद में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की। उन्हें उनके समर्थक ‘दीदी’ कहकर पुकारते हैं। वे लंबे समय तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं और अपनी जमीनी राजनीति के लिए जानी जाती हैं।








