Thursday, February 26, 2026

चार साल की सेवा के बाद अब क्या? अग्निवीरों के लिए खुला रेलवे का बड़ा दरवाज़ा, रिटायर जवानों को मिलेगा नया करियर

देश के हजारों अग्निवीरों और रिटायर होने वाले सैनिकों के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। Indian Army और Indian Railways ने मिलकर एक विशेष सहयोग ढांचा (फ्रेमवर्क ऑफ कोऑपरेशन) तैयार किया है, जिसका उद्देश्य सेना से सेवा समाप्ति के बाद जवानों को स्थिर और सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना है।

अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि आगे उनका करियर किस दिशा में जाएगा। इस नए समझौते से उस अनिश्चितता को काफी हद तक कम करने की कोशिश की गई है। अब सेना से बाहर आने वाले जवानों को रेलवे में उपलब्ध पदों की जानकारी, आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों के बारे में मार्गदर्शन दिया जाएगा।

रेल मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के बीच हुआ यह सहयोग केवल औपचारिक घोषणा नहीं है, बल्कि इसे लागू करने के लिए संयुक्त रूप से दिशानिर्देश भी तैयार किए जाएंगे। सेना के आधिकारिक माध्यमों से जवानों तक नियमित रूप से नौकरी संबंधी अपडेट पहुंचाए जाएंगे, ताकि वे समय रहते तैयारी कर सकें। यह पहल जवानों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।

भर्ती प्रक्रिया होगी आसान, कौशल के अनुसार मिलेंगे पद

इस योजना का सबसे अहम पहलू भर्ती प्रक्रिया को सरल और व्यवस्थित बनाना है। रेलवे देश के सबसे बड़े सरकारी नियोक्ताओं में से एक है, जहां संचालन, रखरखाव, ट्रैक प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स, प्रशासन और सुरक्षा जैसे कई विभाग हैं। इन क्षेत्रों में सेना से प्रशिक्षित जवानों के अनुशासन, तकनीकी समझ और टीमवर्क का सीधा लाभ मिल सकता है।

रेलवे में प्वाइंट्समैन, ट्रैक मेंटेनर, तकनीकी सहायक, संचालन स्टाफ और सुरक्षा से जुड़े पदों पर पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा, पहले से लागू पूर्व सैनिक आरक्षण और आयु सीमा में छूट जैसे प्रावधानों का लाभ भी उन्हें मिलता रहेगा।

अग्निपथ योजना के तहत सीमित संख्या में अग्निवीरों को ही स्थायी रूप से सेना में शामिल किया जाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में युवाओं को चार साल बाद नई नौकरी की तलाश करनी होती है। इस समझौते के जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश है कि उनकी सैन्य ट्रेनिंग बेकार न जाए, बल्कि नागरिक सेवाओं में उसका बेहतर उपयोग हो सके। इससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्पष्टता भी बढ़ेगी।

हजारों जवानों को हर साल मिलेगा फायदा

अनुमान है कि हर वर्ष हजारों सैनिक और अग्निवीर सेवा से मुक्त होते हैं। अब तक उनके सामने निजी क्षेत्र या छोटी-मोटी नौकरियों का विकल्प ज्यादा होता था, लेकिन रेलवे जैसी बड़ी सरकारी संस्था में अवसर मिलना उनके लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

इस पहल के तहत केवल नौकरी की जानकारी ही नहीं, बल्कि करियर काउंसलिंग, दस्तावेज़ी सहायता और आवेदन की तैयारी में भी सहयोग दिया जाएगा। सेना के अंदर ही ऐसे सत्र आयोजित किए जा सकते हैं, जहां जवानों को बताया जाएगा कि रेलवे में कौन-कौन से पद उनके अनुभव के अनुरूप हैं और चयन प्रक्रिया कैसी होगी।

इससे जवानों का मनोबल भी बढ़ेगा, क्योंकि उन्हें यह भरोसा रहेगा कि देश सेवा के बाद भी सरकार उनके भविष्य को लेकर गंभीर है। आर्थिक स्थिरता मिलने से उनके परिवारों को भी सुरक्षा का एहसास होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल आगे चलकर अन्य सरकारी विभागों के साथ भी अपनाया जा सकता है।

देश सेवा से नागरिक सेवा तक: नई पहचान की ओर कदम

यह समझौता केवल नौकरी देने की योजना नहीं, बल्कि सैनिकों के नागरिक जीवन में सहज परिवर्तन की प्रक्रिया को मजबूत करने की कोशिश है। सेना में सीखा गया अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और संकट प्रबंधन का अनुभव रेलवे जैसे विशाल नेटवर्क में बेहद उपयोगी हो सकता है।

रेलवे देश के हर कोने तक पहुंच रखता है और लाखों लोगों की रोजमर्रा की यात्रा से जुड़ा है। ऐसे में यहां कार्यरत कर्मचारी की जिम्मेदारी भी बड़ी होती है। पूर्व सैनिक इस जिम्मेदारी को समझते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी काम करने के अभ्यस्त होते हैं।

सरकार का उद्देश्य यही है कि अग्निवीर और रिटायर जवान अपने कौशल का उपयोग करते हुए देश की सेवा जारी रखें, भले ही उनका कार्यक्षेत्र बदल जाए। आने वाले महीनों में पहले बैच के अग्निवीर सेवा से मुक्त होने वाले हैं, ऐसे में यह पहल उनके लिए समय पर राहत लेकर आई है। यदि दिशा-निर्देश स्पष्ट और पारदर्शी तरीके से लागू किए गए, तो यह योजना हजारों परिवारों के लिए नई उम्मीद साबित हो सकती है।

 

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