यह कहानी सिर्फ एक सुसाइड की कोशिश नहीं है, बल्कि उस खोखले सिस्टम का सच है जो चंद कागजी वादों के दम पर जिंदा इंसानों की उम्मीदों का कत्ल कर देता है। राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक ऐसी दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे सूबे के प्रशासनिक अमले पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 25 दिन पहले नौकरी से अचानक हटाए जाने के सदमे में संविदा नर्सिंग कर्मी दीपक खारवाल ने जहर खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी। पति की मौत के बाद उनकी गर्भवती पत्नी करिश्मा पूरी तरह टूट चुकी थीं, लेकिन प्रशासन ने उस वक्त उनकी गोद में पल रहे बच्चे और उनके भविष्य की जिम्मेदारी लेने का बड़ा वादा किया था। अफ़सोस, वादे सिर्फ फाइलों में दबे रह गए और थक-हारकर आखिरकार उस बेबस गर्भवती विधवा ने भी वही खौफनाक रास्ता चुन लिया, जिस पर चलकर उसके पति ने दुनिया को अलविदा कहा था।
25 दिन का इंतजार, टूटी उम्मीदें और फिर कीटनाशक की वो बोतल
करिश्मा के पिता राम सिंह खारवाल का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि दीपक की मौत के बाद जब पूरा नर्सिंग स्टाफ सड़कों पर आंदोलन कर रहा था, तब बड़े-बड़े अफसरों और नेताओं ने करिश्मा के आंसू पोंछे थे। प्रशासन ने लिखित और मौखिक तौर पर वादा किया था कि करिश्मा को संविदा पर तुरंत नौकरी दी जाएगी और परिवार के भरण-पोषण के लिए उचित आर्थिक मुआवजा मिलेगा। दिन बीतते गए, सूरज उगता और ढलता रहा, लेकिन सरकारी दफ्तरों से न तो नौकरी का कोई आदेश आया और न ही मुआवजे की कोई राशि। 25 दिनों तक रोज उम्मीद और फिर निराशा का सामना करते-करते करिश्मा डिप्रेशन के उस दौर में पहुंच गईं जहां उन्हें आगे सिर्फ अंधेरा दिखाई दिया। आखिरकार, सरकारी सिस्टम की बेरुखी से आहत होकर उन्होंने घर में रखा कीटनाशक पी लिया।
अगले 24 घंटे बेहद अहम, दो जिंदगियों पर मंडरा रहा है मौत का साया
जैसे ही करिश्मा के जहर खाने की बात परिवार को पता चली, घर में कोहराम मच गया। उन्हें तुरंत आनन-फानन में जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल करिश्मा आईसीयू में वेंटिलेटर और डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं। डॉक्टरों का कहना है कि करिश्मा की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और अगले 24 घंटे उनकी जिंदगी के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि करिश्मा गर्भवती हैं। उनके पेट में पल रहे अजन्मे बच्चे पर इस जहर का क्या असर हुआ है, डॉक्टर इसकी गहनता से जांच कर रहे हैं। अस्पताल के गलियारे में इस वक्त सिर्फ चीखें और दुआएं हैं, जहाँ एक परिवार अपनी बेटी और होने वाले पोते/नवासे दोनों की जिंदगी की भीख मांग रहा है।
अस्पताल पहुंचे टीकाराम जूली, वादों की सियासत और सरकार पर तीखा वार
इस संवेदनशील और दर्दनाक मामले के सामने आते ही राजस्थान की सियासत में भी उबाल आ गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली तुरंत एसएमएस अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर करिश्मा का हाल जाना। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की भजनलाल शर्मा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए तीखा हमला बोला। जूली ने कहा कि यह सरकार संवेदनहीन हो चुकी है। इन्हें गरीब संविदा कर्मचारियों और उनके रोते-बिलखते परिवारों की कोई फिक्र नहीं है, बल्कि सरकार का पूरा ध्यान सिर्फ बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने में लगा है। दीपक की मौत के समय किए गए वादे अगर समय रहते पूरे कर दिए जाते, तो आज एक गर्भवती महिला अस्पताल के बेड पर जिंदगी और मौत की जंग नहीं लड़ रही होती। अब देखना यह है कि इस घटना के बाद भी क्या सरकार की नींद टूटती है या फिर फाइलों का दौर यूं ही चलता रहेगा।
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