खेल का मैदान अक्सर भाईचारे और प्रतिस्पर्धा के लिए जाना जाता है, लेकिन ब्रिटेन के डर्बीशायर में एक कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान जो हुआ, उसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। अगस्त 2023 की वो शाम जब लोग खेल का आनंद लेने आए थे, अचानक चीख-पुकार और हथियारों की खनक में बदल गई। अब करीब दो साल बाद, इस हिंसा के मुख्य आरोपियों को कानून ने सलाखों के पीछे भेज दिया है। डर्बी क्राउन कोर्ट ने भारतीय मूल के तीन व्यक्तियों—बूटा सिंह, दमनजीत सिंह और राजविंदर तखर सिंह को इस दंगे और अवैध हथियार रखने का दोषी पाते हुए लंबी जेल की सजा सुनाई है।
खून-खराबे वाली वो शाम: जब खेल के बीच गूंजी गोलियां
घटना 20 अगस्त 2023 की है, जब अल्वास्टन लेन के पास एक भव्य कबड्डी टूर्नामेंट का आयोजन किया गया था। मैच अपने पूरे रोमांच पर था, तभी अचानक दो गुटों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते यह बहस हिंसक झड़प में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मैदान में न केवल लाठी-डंडे चले, बल्कि गोलियां चलने की आवाज भी सुनाई दी। भगदड़ मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। पुलिस को दी गई शुरुआती सूचनाओं में बताया गया कि उपद्रवी बड़े-बड़े चाकुओं (माचेटे) और बंदूकों से लैस थे, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी।
CCTV फुटेज और पुलिस की जांच: ऐसे फँसे आरोपी
हिंसा के तुरंत बाद डर्बीशायर पुलिस ने गहन जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के सैकड़ों वीडियो फुटेज खंगाले। इन वीडियो में एक खौफनाक मंजर सामने आया। वीडियो में देखा गया कि बूटा सिंह निहत्था होने के बावजूद दूसरे गुट के सदस्यों का आक्रामक तरीके से पीछा कर रहा था। वहीं, दमनजीत सिंह और राजविंदर तखर सिंह के हाथों में बड़े-बड़े घातक चाकू साफ नजर आ रहे थे, जिनसे वे विपक्षी समूह को डरा रहे थे और हमला करने की कोशिश कर रहे थे। घटना के दो दिन बाद जब पुलिस ने बूटा सिंह की कार को रोका, तो उसकी डिक्की (बूट) से दो बड़े माचेटे बरामद हुए, जिससे साजिश की कड़ियाँ जुड़ती चली गईं।
अदालत का कड़ा रुख: हिंसा फैलाने वालों को नहीं मिली माफी
इस मामले की सुनवाई डर्बी क्राउन कोर्ट में चली, जहाँ अभियोजन पक्ष ने पुख्ता सबूत पेश किए। नवंबर में चले ट्रायल के दौरान तीनों को दंगों में शामिल होने और खतरनाक हथियार रखने का दोषी पाया गया। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक आयोजनों में इस तरह की हिंसा समाज के लिए बड़ा खतरा है। 19 दिसंबर को न्यायाधीश ने अपना फैसला सुनाते हुए तीनों को जेल भेजने का आदेश दिया। बूटा सिंह (35) को हिंसक झड़प और हथियार रखने के जुर्म में सजा मिली, वहीं उसके साथियों को भी उनके कृत्य के अनुसार दंडित किया गया। इस फैसले ने ब्रिटेन में रह रहे प्रवासी समुदाय के बीच एक कड़ा संदेश भेजा है।








