हापुड़ जिले के धौलाना क्षेत्र में शनिवार को महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर निकाली गई बाइक रैली उस समय विवादों में घिर गई, जब कार्यक्रम के दौरान दो पक्ष आमने-सामने आ गए। शुरुआत में माहौल पूरी तरह उत्सव जैसा था। बड़ी संख्या में युवा बाइक और चार पहिया वाहनों के साथ रैली में शामिल हुए थे। सिरोधन गांव से शुरू हुई यह रैली देहरा गांव की ओर बढ़ रही थी, जहां महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर माल्यार्पण कार्यक्रम रखा गया था। रास्ते भर लोग जयकारे लगा रहे थे और जगह-जगह स्वागत की तैयारियां भी की गई थीं। लेकिन जैसे ही रैली देहरा गांव पहुंची, माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मंच के पास दिए गए एक कथित भड़काऊ भाषण को लेकर दूसरे पक्ष ने आपत्ति जताई। पहले बहस हुई और कुछ ही मिनटों में मामला इतना बढ़ गया कि दोनों ओर से नारेबाजी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद हिंसक झड़प में बदल गया और पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
पथराव और तोड़फोड़ से दहशत में आए लोग
स्थिति तब और बिगड़ गई जब दोनों पक्षों की ओर से अचानक पथराव शुरू हो गया। सड़क पर मौजूद लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कई बाइक सवार अपनी गाड़ियां छोड़कर सुरक्षित जगहों की ओर दौड़ पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कुछ उपद्रवियों ने मौके का फायदा उठाकर रास्ते में खड़े वाहनों में भी तोड़फोड़ की। कई कारों और बाइकों के शीशे टूट गए, जबकि कुछ लोगों के साथ मारपीट किए जाने की भी सूचना सामने आई। घटना के बाद पूरे इलाके में डर और तनाव का माहौल बन गया। स्थानीय दुकानदारों ने एहतियात के तौर पर दुकानें बंद कर दीं। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई। लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी दिखाई दी कि प्रशासन ने पहले से सुरक्षा के बड़े दावे किए थे, लेकिन मौके पर पर्याप्त निगरानी नहीं दिखी। रैली में शामिल कई लोगों ने आरोप लगाया कि अगर शुरुआत में ही विवाद को शांत करा दिया जाता तो मामला हिंसा तक नहीं पहुंचता।
पुलिस प्रशासन की तैयारियों पर उठे सवाल
इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। महाराणा प्रताप जयंती को देखते हुए जिले में पहले से अलर्ट जारी किया गया था। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने और रैली की निगरानी के लिए विशेष इंतजाम किए जाने की बात कही गई थी। इसके बावजूद धौलाना क्षेत्र में खुलेआम पथराव और उपद्रव होता रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि रैली में भीड़ काफी ज्यादा थी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था उतनी मजबूत नजर नहीं आई। कई लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस मौके पर देर से पहुंची, जिसके कारण उपद्रवियों को मौका मिल गया। घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर कई वीडियो वायरल होने लगे, जिनमें सड़क पर भगदड़ और पथराव जैसी तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। हालांकि प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो की भी जांच की जा रही है और जो लोग माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भारी पुलिस बल तैनात, वीडियो से होगी पहचान
घटना की सूचना मिलते ही कई थानों की पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने लाठी फटकारते हुए दोनों पक्षों को पीछे हटाया और हालात को नियंत्रित किया। इसके बाद इलाके में फ्लैग मार्च भी निकाला गया ताकि लोगों में भरोसा कायम किया जा सके। फिलहाल गांव और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। एसपी कुंवर ज्ञानंजय सिंह ने बताया कि घटनास्थल के वीडियो फुटेज और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग खंगाली जा रही हैं। जिन लोगों ने पथराव, तोड़फोड़ या हिंसा में हिस्सा लिया है, उनकी पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि किसी भी हाल में कानून व्यवस्था बिगड़ने नहीं दी जाएगी। वहीं स्थानीय लोग अब इलाके में स्थायी शांति और भविष्य में ऐसे आयोजनों के दौरान मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बड़े आयोजनों में सुरक्षा के दावों और जमीन पर मौजूद व्यवस्था के बीच आखिर इतना बड़ा अंतर क्यों रह जाता है।
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