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लखनऊ में रातों-रात लगे अखिलेश यादव के विवादित पोस्टर, ‘कटियाबाज’ वाले होर्डिंग्स से मचा सियासी तूफान

लखनऊ में अखिलेश यादव को लेकर विवादित पोस्टर लगने से सियासी बवाल मच गया। बंगला बाजार और पुरानी जेल रोड पर लगे होर्डिंग्स सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

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लखनऊ

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार देर रात अचानक लगे कुछ विवादित पोस्टरों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया। बंगला बाजार और पुरानी जेल रोड इलाके में कई जगह समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर आपत्तिजनक होर्डिंग्स लगाए गए। इन पोस्टरों में अखिलेश यादव को “कटियाबाज” बताया गया है और समाजवादी पार्टी की सरकार पर बिजली को लेकर तुष्टिकरण की राजनीति करने के आरोप लगाए गए हैं। सुबह जब लोगों की नजर इन होर्डिंग्स पर पड़ी तो इलाके में चर्चा शुरू हो गई। कुछ ही घंटों में इन पोस्टरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं, जिसके बाद मामला तेजी से राजनीतिक रंग लेने लगा। स्थानीय लोगों के मुताबिक कई जगहों पर एक जैसे पोस्टर लगे हुए थे, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह पूरी योजना के तहत किया गया काम हो सकता है। हालांकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इन पोस्टरों के पीछे कौन लोग हैं और किस संगठन ने इन्हें लगवाया।

पोस्टरों में आजम खान और जिया उर रहमान बर्क पर भी निशाना

इन विवादित होर्डिंग्स में सिर्फ अखिलेश यादव ही नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी के अन्य नेताओं को भी निशाने पर लिया गया है। पोस्टरों में सपा नेता आजम खान और संभल सांसद जिया उर रहमान बर्क का नाम भी शामिल किया गया है। उन पर बिजली चोरी के आरोपों का जिक्र करते हुए तीखे स्लोगन लिखे गए हैं। कुछ पोस्टरों में “रमजान में बिजली फुल, दिवाली पर बिजली गुल” जैसे नारे भी लिखे गए हैं, जिन्हें लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। पोस्टरों में कई मीडिया रिपोर्ट्स और पुराने मामलों का हवाला देते हुए सपा सरकार को घेरने की कोशिश की गई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस तरह के पोस्टर चुनावी माहौल से पहले राजनीतिक तनाव बढ़ा सकते हैं। राजधानी के प्रमुख इलाकों में इतने बड़े स्तर पर पोस्टर लगना भी कई सवाल खड़े कर रहा है। लोग यह जानना चाह रहे हैं कि आखिर प्रशासन की नजर से बचकर इतने पोस्टर रातों-रात कैसे लगा दिए गए।

सोशल मीडिया पर वायरल होते ही बढ़ा विवाद

पोस्टरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल और तेज हो गई। अलग-अलग राजनीतिक दलों के समर्थक इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं, तो कुछ इसे विरोध की नई रणनीति मान रहे हैं। एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर इन पोस्टरों की तस्वीरें तेजी से शेयर की जा रही हैं। कई यूजर्स ने इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया है, जबकि कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की आजादी से जोड़कर देख रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में पोस्टर वार कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार इस्तेमाल की गई भाषा और आरोपों ने विवाद को और बड़ा बना दिया है। फिलहाल समाजवादी पार्टी की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि पार्टी कार्यकर्ताओं में इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है और माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

पुलिस और प्रशासन की चुप्पी पर भी उठ रहे सवाल

इस पूरे मामले में अब तक पुलिस या जिला प्रशासन की तरफ से कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है। यह भी साफ नहीं हुआ है कि विवादित पोस्टर किसने लगाए और इनके पीछे कौन लोग शामिल हैं। राजधानी के व्यस्त इलाकों में इस तरह के पोस्टर लगने के बावजूद प्रशासन की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला और बड़ा विवाद बन सकता है। दूसरी ओर विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला बोल सकते हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होगी। उत्तर प्रदेश की राजनीति में पहले भी पोस्टर और बैनर को लेकर कई बार विवाद खड़े होते रहे हैं, लेकिन इस बार मामला सीधे बड़े नेताओं की छवि से जुड़ा होने के कारण ज्यादा संवेदनशील माना जा रहा है। फिलहाल राजधानी में लगे इन पोस्टरों ने राजनीतिक तापमान जरूर बढ़ा दिया है और सभी की नजर अब प्रशासन और राजनीतिक दलों की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

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