तमिलनाडु की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब टीवीके प्रमुख सी जोसेफ विजय ने चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 1967 के बाद यह पहला मौका है जब राज्य में DMK और AIADMK के बाहर का कोई नेता सत्ता की कुर्सी तक पहुंचा है। अभिनेता से नेता बने विजय की इस जीत ने तमिलनाडु की राजनीति का पूरा समीकरण बदल दिया है। हालांकि सरकार बनाने का रास्ता उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था। विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद बहुमत के आंकड़े से दूर रहने के कारण उन्हें कांग्रेस, वामपंथी दलों और कुछ क्षेत्रीय पार्टियों का समर्थन लेना पड़ा। सरकार गठन को लेकर विजय ने राज्यपाल से कई दौर की मुलाकातें कीं, जिसके बाद आखिरकार उन्हें सरकार बनाने का न्योता मिला। विजय के मुख्यमंत्री बनते ही उनके समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और पूरे तमिलनाडु में जश्न का माहौल बन गया।
पीएम मोदी ने कांग्रेस पर बोला बड़ा हमला
विजय सरकार के गठन के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। कर्नाटक के बेंगलुरु में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस अब “परजीवी पार्टी” बन चुकी है, जो अपने राजनीतिक फायदे के लिए सहयोगियों को भी छोड़ देती है। उन्होंने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि DMK ने कई दशकों तक कांग्रेस का हर संकट में साथ दिया, लेकिन मौका मिलते ही कांग्रेस ने उसे किनारे कर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि यूपीए सरकार के दौर में DMK कांग्रेस की सबसे मजबूत सहयोगी रही और उसने केंद्र की सरकार को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बावजूद कांग्रेस ने राजनीतिक परिस्थितियां बदलते ही अपना रुख बदल लिया। पीएम मोदी के इस बयान के बाद राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है और विपक्षी गठबंधन के अंदर नए सवाल उठने लगे हैं।
कांग्रेस-DMK रिश्तों पर उठे सवाल
प्रधानमंत्री मोदी के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस और DMK के रिश्तों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लंबे समय तक दक्षिण भारत में कांग्रेस की राजनीति DMK के सहारे मजबूत बनी रही। कई चुनावों में दोनों दलों ने मिलकर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोला था। लेकिन इस बार तमिलनाडु में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए। विजय की पार्टी TVK के तेजी से उभरने के बाद कांग्रेस ने नई रणनीति अपनाई और सत्ता में हिस्सेदारी के लिए TVK का समर्थन कर दिया। इसी फैसले को लेकर भाजपा कांग्रेस को घेर रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस ने दक्षिण भारत में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए यह बड़ा दांव खेला है। वहीं DMK समर्थकों के बीच इस फैसले को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है। कई नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने वर्षों पुराने रिश्ते को सत्ता के लिए पीछे छोड़ दिया। हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी तक पीएम मोदी के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विजय सरकार के सामने अब असली चुनौती
तमिलनाडु में सरकार बनाने के बाद अब विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती गठबंधन को एकजुट बनाए रखने की होगी। उनकी सरकार कई छोटे दलों और कांग्रेस-वामपंथी समर्थन पर टिकी हुई है। ऐसे में हर फैसले पर सहयोगी दलों की सहमति जरूरी होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय को सिर्फ लोकप्रियता के सहारे नहीं, बल्कि प्रशासनिक क्षमता के दम पर भी खुद को साबित करना होगा। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने युवाओं के रोजगार, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई और तमिलनाडु के विकास को लेकर कई बड़े वादे किए थे। अब जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि उनकी सरकार इन वादों को कितनी तेजी से पूरा कर पाती है। दूसरी ओर भाजपा भी दक्षिण भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति और ज्यादा दिलचस्प होने की संभावना है, क्योंकि विजय की नई सरकार का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।
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