यूपी पुलिस महकमे में इन दिनों हड़कंप मचा हुआ है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने जनशिकायतों के निस्तारण में कोताही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपना लिया है। हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान लापरवाही उजागर होने पर प्रदेश के 9 जिलों के 10 थानाध्यक्षों (SHO) को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से पूरे पुलिस महकमे में अफरा-तफरी का माहौल है और सभी जिलों के अधिकारी अपनी कार्यशैली को लेकर अलर्ट मोड पर आ गए हैं।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में खुली पोल, इन जिलों के एसएचओ नपे
प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीजीपी ने आगामी कानून-व्यवस्था और जनसुनवाई की स्थिति को लेकर प्रदेशभर के तमाम जोन, परिक्षेत्र और जिला प्रभारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक अहम बैठक की थी। इस वर्चुअल समीक्षा में जब जनशिकायतों के समाधान और आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर दर्ज मामलों की प्रगति परखी गई, तो कई जगहों पर गंभीर लापरवाही पाई गई। इसके बाद लखनऊ के बाबू बनारसीदास (बीबीडी) थाने के प्रभारी समेत खीरी, उन्नाव, एटा, आगरा, प्रतापगढ़, बदायूं, बिजनौर और मथुरा जिलों के कुल 10 थानाध्यक्षों को हटाते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश जारी कर दिए गए।
मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश: थाने स्तर पर ही हो समस्याओं का समाधान
राज्य सरकार जनशिकायतों के प्रभावी और त्वरित निस्तारण को लेकर हमेशा से गंभीर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं कि जनता की समस्याओं का समाधान पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ किया जाना चाहिए। डीजीपी ने इसी मंशा को आगे बढ़ाते हुए निर्देश दिए हैं कि हर हाल में थाने और चौकी स्तर पर ही शिकायतकर्ताओं की समस्याओं का समुचित समाधान होना चाहिए। आदेश में यह भी कहा गया है कि किसी भी शिकायत को दर्ज करने से मना न किया जाए, ताकि आम जनता को अपनी फरियाद लेकर पुलिस मुख्यालय या जिला मुख्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।
तीन दिन के भीतर मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
डीजीपी के इस कड़े एक्शन के बाद मातहत अधिकारियों में यह संदेश साफ है कि कार्य में किसी भी प्रकार की हीला-हवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यालय द्वारा संबंधित सभी जिलों से इन मामलों और कार्रवाई को लेकर तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। इसके साथ ही, भूमि विवादों, स्थानीय समस्याओं और संवेदनशील मामलों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस अधिकारियों को आपसी समन्वय मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इस सख्त कार्रवाई से आम नागरिकों की शिकायतों पर अब थानों में तेजी से और पारदर्शी तरीके से सुनवाई होगी।
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