टड़ियावां/हरदोई: विकासखंड टड़ियावां के ग्राम बहोरवा स्थित श्री बाबा शुकदेव आश्रम (बुआ जी वाला बाग) में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन श्रद्धालुओं को धर्म, मर्यादा और पारिवारिक संस्कारों का संदेश दिया गया। कथा व्यास श्री राधे गोविन्द जी महाराज (श्री श्री 1008 रामास्वामी) ने भगवान श्रीराम और विभीषण के संवाद के साथ कन्यादान की महत्ता पर प्रकाश डाला। कथा के दौरान उन्होंने समझाया कि मनुष्य के जीवन में सत्य, साहस, सदाचार और ईश्वर के प्रति विश्वास का विशेष स्थान है। धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को अच्छे आचरण और संस्कारों को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा दी गई।
भगवान श्रीराम ने बताया ऐसा कवच, जिसे कोई शक्ति नहीं सकती भेद
कथा में भगवान श्रीराम और विभीषण के संवाद का उल्लेख करते हुए व्यास जी ने बताया कि विभीषण ने प्रभु श्रीराम से उनके सुरक्षा कवच के बारे में सवाल किया था। इस पर भगवान श्रीराम ने समझाया कि सच्चाई, धर्म, साहस, सदाचार और ईश्वर पर अटूट विश्वास ही मनुष्य की सबसे बड़ी सुरक्षा हैं। ये गुण विपरीत परिस्थितियों में भी व्यक्ति को मजबूती प्रदान करते हैं। इसके साथ ही कथा व्यास ने कन्यादान की महिमा बताते हुए कहा कि यह केवल विवाह की एक परंपरा नहीं, बल्कि माता-पिता के स्नेह, आशीर्वाद और विश्वास से जुड़ा पवित्र भाव है। बेटी को अच्छे संस्कारों के साथ नए जीवन की शुरुआत के लिए विदा करना भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
28 अक्टूबर को हवन-पूजन के बाद होगा विशाल भंडारा, आयोजकों ने किया आमंत्रित
आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का समापन मंगलवार, 27 अक्टूबर को होगा। इसके बाद बुधवार, 28 अक्टूबर को हवन-पूजन और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। हवन के दौरान श्रद्धालु वैदिक विधि-विधान से आहुतियां अर्पित करेंगे। इसके उपरांत भंडारे में भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाएगा। आयोजन की ओर से श्री बाबा शुकदेव जी महाराज के माध्यम से समस्त ग्रामवासियों और क्षेत्रवासियों को कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर हवन-पूजन में भाग लेने और भंडारे का प्रसाद ग्रहण करने की अपील की है।
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