SAD Women Reservation: महिला आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी को विपक्षी खेमे से अहम समर्थन मिला है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को जल्द लागू करने की मांग की है। पार्टी के इस रुख का केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्वागत किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब केंद्र सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को लेकर अलग-अलग दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।
सुखबीर बादल की बैठक के बाद आया बड़ा फैसला
शिरोमणि अकाली दल ने 8 अगस्त को चंडीगढ़ में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। इसके बाद पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने महिला आरक्षण को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि पार्टी महिलाओं की गरिमा, समानता और बराबरी के अधिकारों को महत्व देती है। SAD का कहना है कि महिलाओं को राजनीति में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और इसके लिए आरक्षण की व्यवस्था को जल्द लागू किया जाना चाहिए। पार्टी के इस फैसले को केंद्र सरकार के लिए महत्वपूर्ण समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।
किरेन रिजिजू ने किया फैसले का स्वागत
SAD के फैसले पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अकाली दल के रुख का स्वागत किया। रिजिजू ने कहा कि महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने की दिशा में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की व्यवस्था एक उदाहरण है। अकाली दल ने भी इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए महिला आरक्षण को लागू करने की मांग की है। इससे साफ है कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को एक और राजनीतिक दल का समर्थन मिला है।
परिसीमन पर भी SAD ने रखी अपनी मांग
महिला आरक्षण के साथ ही शिरोमणि अकाली दल ने परिसीमन को लेकर भी अपनी बात रखी है। सुखबीर बादल ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए और सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। पार्टी ने संसद में राज्यों की सीटों में एक समान 50 फीसदी बढ़ोतरी के प्रस्ताव का समर्थन करने की बात कही है। SAD का कहना है कि महिला आरक्षण और परिसीमन, दोनों मुद्दों पर जल्द फैसला होना चाहिए।
2029 के चुनाव को लेकर है पूरा मामला
केंद्र सरकार की ओर से संसद में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत 2029 में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की योजना बताई गई है। साथ ही लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। सरकार इस मुद्दे पर विपक्षी दलों और NDA के सहयोगियों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में SAD का समर्थन महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्ताव के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
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