स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर चल रही बहस के बीच CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखी टिप्पणी की है। 23 सितंबर को सोशल मीडिया पोस्ट में दीपके ने ज्ञानेश कुमार को लेकर बेहद कड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची से 12 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए जाने की खबरें सामने आई हैं। दीपके ने यह भी आरोप लगाया कि CEC चुनाव कराने के बजाय चुनाव की “स्क्रिप्ट” तैयार कर रहे हैं। ये उनके व्यक्तिगत आरोप और राजनीतिक बयान हैं।
SIR को लेकर क्या है पूरा विवाद?
SIR के तहत मतदाता सूचियों की दोबारा जांच और संशोधन किया जा रहा है। 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि चुनाव आयोग के दो सदस्य—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से बढ़ी चर्चा
रिपोर्ट के मुताबिक, आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने तथा चुनावी डेटा से जुड़े सॉफ्टवेयर के संचालन जैसे मुद्दे शामिल थे। एक अन्य रिपोर्ट में Form-6 में SIR से जुड़ा सवाल जोड़े जाने को लेकर भी दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्ति का उल्लेख है। उनका कहना था कि वैधानिक फॉर्म में बदलाव के लिए संबंधित नियमों में संशोधन जरूरी है।
चुनाव आयोग ने दावों पर क्या कहा?
वहीं चुनाव आयोग के सूत्रों ने रिपोर्ट में उठाए गए मतभेदों की तस्वीर को अलग बताया है। आयोग की ओर से कहा गया कि SIR सहित उसके फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए हैं और फैसलों में सर्वसम्मति रही है। इस तरह एक तरफ दो चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों वाली रिपोर्ट सामने आई है, जबकि दूसरी तरफ आयोग सभी फैसलों को सर्वसम्मत बता रहा है। SIR को लेकर विवाद का केंद्र अब मतदाता सूची में बदलाव के साथ-साथ आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया भी बन गई है।






