उत्तर प्रदेश में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद सियासी माहौल गर्म हो गया है। समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव और उनके सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों पर ईडी ने एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई झांसी और लखनऊ में की गई। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच करते हुए कई दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई पहले से दर्ज मामले के आधार पर की जा रही है। वहीं, इस कार्रवाई के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने सरकार और जांच एजेंसी पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर साधा निशाना
ईडी की छापेमारी के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि छापेमारी वहां भी होनी चाहिए जहां बड़े स्तर पर कथित गड़बड़ियां हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां केवल चुनिंदा मामलों में कार्रवाई कर रही हैं। अखिलेश यादव के इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रहा है, जबकि जांच एजेंसियों का कहना है कि उनकी कार्रवाई पूरी तरह कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
आय से अधिक संपत्ति के मामले से जुड़ी है जांच
ईडी की जांच उत्तर प्रदेश विजिलेंस एस्टैब्लिशमेंट द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई है। इस एफआईआर में पूर्व विधायक पर आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप लगाए गए हैं। इसके बाद ईडी ने ईसीआईआर दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच शुरू की। जांच एजेंसी का दावा है कि शुरुआती जांच में कुछ कंपनियों, रियल एस्टेट कारोबार और अन्य व्यावसायिक संस्थाओं के जरिए धन के लेनदेन के संकेत मिले हैं। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं इन संस्थाओं का इस्तेमाल कथित अवैध धन को वैध दिखाने के लिए तो नहीं किया गया। फिलहाल इन आरोपों की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड की हो रही जांच
छापेमारी के दौरान ईडी ने कई अहम दस्तावेज, कंप्यूटर, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। अब इन सभी दस्तावेजों की विस्तार से जांच की जा रही है। एजेंसी का उद्देश्य धन के स्रोत, लेनदेन और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच करना है। ईडी के अनुसार, मामले में पहले से कई एफआईआर दर्ज हैं और सभी पहलुओं को जोड़कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, इस पूरे मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
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