मायावती के दरवाजे पहुंचे कांग्रेस नेता पर मचा बवाल, नोटिस मिलते ही बोले- ‘खून से बड़ा है हमारा रिश्ता!’

उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस वक्त नया विवाद खड़ा हो गया जब कांग्रेस के एससी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम, बाराबंकी सांसद तनुज पुनिया के साथ बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो Mayawati से मिलने उनके लखनऊ स्थित आवास पहुंचे। हालांकि दोनों नेताओं की मायावती से मुलाकात नहीं हो सकी और उन्हें वापस लौटना पड़ा, लेकिन इस घटनाक्रम ने कांग्रेस और बसपा के बीच संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया। मामला सार्वजनिक होने के बाद कांग्रेस संगठन के भीतर भी हलचल बढ़ गई। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष Ajay Rai ने साफ कहा कि इस मुलाकात की जानकारी पार्टी नेतृत्व को नहीं दी गई थी, जबकि यूपी कांग्रेस प्रभारी Avinash Pande ने संबंधित नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात कही। इसके बाद यह मुद्दा केवल एक शिष्टाचार मुलाकात तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक संदेश और अनुशासन से जोड़कर देखा जाने लगा।

वीडियो जारी कर राजेंद्र पाल गौतम ने दी सफाई

नोटिस मिलने के बाद कांग्रेस नेता Rajendra Pal Gautam ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर करीब सात मिनट का वीडियो जारी कर पूरे विवाद पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनका मायावती के घर जाना किसी राजनीतिक साजिश या पार्टी विरोधी गतिविधि का हिस्सा नहीं था, बल्कि सामाजिक संबंधों और बहुजन आंदोलन की भावना से जुड़ा कदम था। वीडियो में उन्होंने तथागत बुद्ध, संत रविदास, कबीरदास, गुरु नानक देव, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, शाहूजी महाराज, पेरियार, डॉ. भीमराव आंबेडकर और मान्यवर कांशीराम जैसे महापुरुषों का जिक्र करते हुए कहा कि इन सभी ने सामाजिक न्याय और बहुजन समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उन्होंने दावा किया कि बहन मायावती ने भी अपना जीवन इसी आंदोलन को समर्पित किया है। गौतम ने कहा कि समाज और आंदोलन की बात आने पर नेताओं को पार्टी की सीमाओं से ऊपर उठकर संवाद करना चाहिए। उनके मुताबिक, “मंत्री या मुख्यमंत्री बनना समाज से बड़ा नहीं होता।”

‘मायावती परिवार से पुराने रिश्ते’, बयान से बढ़ी सियासी चर्चा

राजेंद्र पाल गौतम ने अपने वीडियो में मायावती और उनके परिवार के साथ पुराने सामाजिक संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह पहले भी दिल्ली के इंद्रपुरी स्थित मायावती के घर जा चुके हैं और वहां उन्हें परिवार की ओर से सम्मान मिला था। गौतम ने कहा कि उनके और मायावती परिवार के बीच संबंध राजनीति से ज्यादा सामाजिक और वैचारिक हैं। उन्होंने कहा, “हमारा रिश्ता प्यार, मिशन और समाज का रिश्ता है। बहुजन आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच खून के रिश्ते से भी बड़ा रिश्ता होता है।” इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विपक्षी दल इसे कांग्रेस और बसपा के बीच बढ़ती नजदीकियों से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कांग्रेस इसे व्यक्तिगत और सामाजिक मुलाकात बता रही है। हालांकि, पार्टी की ओर से जारी नोटिस यह संकेत भी देता है कि कांग्रेस नेतृत्व इस पूरे मामले को हल्के में नहीं लेना चाहता।

UP की राजनीति में क्या बदलेंगे नए समीकरण?

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों के बीच नए समीकरण बनने की संभावनाएं लगातार चर्चा में हैं। ऐसे समय में कांग्रेस नेताओं का मायावती से मिलने जाना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। हालांकि अभी तक बसपा की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं राजेंद्र पाल गौतम ने साफ किया कि वह केवल मायावती का कुशलक्षेम जानने और सामाजिक मुद्दों पर संवाद की भावना से उनके आवास गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि वहां मौजूद स्टाफ ने उनका सम्मान किया और भरोसा दिलाया कि उनका संदेश बहन जी तक पहुंचा दिया जाएगा। बावजूद इसके, यह मामला अब केवल एक मुलाकात नहीं रह गया है, बल्कि यूपी की राजनीति में संभावित बदलाव, बहुजन वोट बैंक और विपक्षी रणनीति के नजरिए से भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में कांग्रेस इस मामले पर क्या रुख अपनाती है और बसपा की प्रतिक्रिया क्या होती है, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।

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