“दिल्ली के गॉडफादर” बयान पर घिरे अभिषेक बनर्जी, कोर्ट ने दी राहत लेकिन लगाई बड़ी शर्त

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद Abhishek Banerjee को “दिल्ली के गॉडफादर” वाले बयान को लेकर चल रहे विवाद में फिलहाल बड़ी कानूनी राहत मिल गई है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि अभी इस मामले में उनकी गिरफ्तारी या हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं दिखती। अदालत ने 31 जुलाई तक उनके खिलाफ किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई पर रोक लगा दी है। हालांकि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उनके बयान पर नाराजगी भी जाहिर की और कहा कि सार्वजनिक जीवन में मौजूद नेताओं को शब्दों का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक बहस का भी विषय बन गया है।

विदेश यात्रा पर रोक, जांच में सहयोग जरूरी

अदालत ने राहत देते हुए कई सख्त शर्तें भी लगाई हैं। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि Abhishek Banerjee बिना अदालत की अनुमति के विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगे। साथ ही उन्हें जांच एजेंसियों द्वारा भेजे गए हर नोटिस का जवाब देना होगा और पूछताछ में पूरा सहयोग करना पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच अधिकारी मामले की जांच जारी रख सकते हैं ताकि पूरे विवाद की सच्चाई सामने आ सके। अदालत ने पुलिस को यह छूट भी दी कि अगर जांच में सहयोग नहीं मिलता है तो वह इसकी जानकारी कोर्ट को दे सकती है। इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि राहत मिलने के बावजूद मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में यह फिर से बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

अमित शाह पर टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद

पूरा विवाद उस बयान से जुड़ा है जिसमें Abhishek Banerjee ने केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah को लेकर कथित तौर पर “दिल्ली का गॉडफादर” जैसी टिप्पणी की थी। इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया था। भाजपा नेताओं ने इसे अपमानजनक बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी थी, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बताया। मामले को लेकर शिकायत दर्ज हुई और पुलिस जांच शुरू हुई। अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह विवाद आने वाले समय में और ज्यादा चर्चा का विषय बन सकता है।

बंगाल की राजनीति में बढ़ेगी हलचल

हाईकोर्ट के फैसले के बाद बंगाल की सियासत में नई हलचल शुरू हो गई है। तृणमूल कांग्रेस इसे कानूनी राहत के तौर पर पेश कर रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि अदालत ने बयान पर नाराजगी जताकर मामले की गंभीरता को भी स्वीकार किया है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और अदालत में होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की नजरें रहेंगी। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे बंगाल और केंद्र की राजनीति के बड़े टकराव से जोड़कर देखा जाएगा। फिलहाल राहत मिलने से Abhishek Banerjee को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन विदेश यात्रा पर रोक और जांच में सहयोग की शर्तों ने उनकी मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं होने दी हैं। अब देखना होगा कि आने वाले हफ्तों में यह मामला कौन सा नया मोड़ लेता है।

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