दिल्ली की ओखला सीट से विधायक अमानतुल्लाह खान ने आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या राघव चड्ढा पार्टी को वह सब कुछ वापस कर सकते हैं, जो उन्होंने इतने कम समय में हासिल किया। अमानतुल्लाह ने याद दिलाया कि पार्टी ने चड्ढा को 2019 में लोकसभा टिकट दिया, 2020 में विधायक और दिल्ली जल बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया और फिर 2022 में राज्यसभा भेजा। उनका आरोप है कि जब पार्टी मुश्किल में थी, तब राघव ने दूरी बना ली। इस बयान के बाद AAP के अंदर चल रही खींचतान खुलकर सामने आ गई है।
‘मुझे खामोश किया गया’—राघव चड्ढा का वीडियो बना विवाद की जड़
विवाद की शुरुआत तब हुई जब राघव चड्ढा ने एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि उन्हें राज्यसभा में बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा और पार्टी की ओर से इस संबंध में चिट्ठी लिखी गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनके इस बयान ने पार्टी के भीतर असहमति को और हवा दे दी। कई नेताओं ने इसे पार्टी लाइन के खिलाफ कदम बताया और खुलकर प्रतिक्रिया दी। इस घटनाक्रम ने यह संकेत दिया कि AAP के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा और बड़े स्तर पर मतभेद उभर रहे हैं।
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### **उप-हेडलाइन: सौरभ भारद्वाज का पलटवार—‘डर कर राजनीति नहीं होती’**
दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी राघव चड्ढा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह केंद्र सरकार और खासकर नरेंद्र मोदी का नाम लेने से बचते हैं। उन्होंने सवाल किया कि राजनीति में डर का क्या स्थान है और क्या डर के साथ जनता की लड़ाई लड़ी जा सकती है। भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी राघव चड्ढा को प्रमोट करती है और उनके सोशल मीडिया पोस्ट को आगे बढ़ाती है ताकि असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके। उनके इस बयान ने विवाद को और गहरा कर दिया है और यह साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असहमति बढ़ रही है।
आतिशी का हमला—‘लोकतंत्र की लड़ाई में साथ नहीं दिखे राघव’
AAP की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने भी राघव चड्ढा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष लोकतंत्र पर हमले के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठा रहा था, तब राघव चड्ढा उस एकजुटता का हिस्सा नहीं बने। उन्होंने आरोप लगाया कि जब टीएमसी की ओर से महाभियोग प्रस्ताव लाया गया, तो चड्ढा ने उस पर हस्ताक्षर नहीं किए और जब विपक्ष ने संसद से वॉकआउट किया, तब भी उन्होंने साथ नहीं दिया। आतिशी का यह बयान दर्शाता है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में भी राघव को लेकर नाराजगी है। इन घटनाओं ने AAP के भीतर संभावित दरार और राजनीतिक भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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