लेबनान में ईरानी कुद्स फोर्स के कमांडर हुसैन महमूद मर्शाद अल-जौहरी के मारे जाने की खबर ने मध्य पूर्व में हड़कंप मचा दिया है। इजरायली सेना ने दावा किया है कि अल-जौहरी को उनकी ऑपरेशंस यूनिट के नेतृत्व के कारण निशाना बनाया गया। अल-जौहरी सीरिया और लेबनान में इजरायल विरोधी मिशनों में सक्रिय थे और उनके मार दिए जाने से इलाके में सुरक्षा की स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है। इजरायली सेना ने इस ऑपरेशन का वीडियो भी जारी किया है, जिसमें हमले के समय की झलक दिखाई गई है।
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अल-जौहरी के मरने से इजरायली सेना को क्षेत्र में अस्थायी फायदा मिल सकता है, लेकिन इससे ईरान की प्रतिक्रिया की संभावना भी बढ़ गई है।
तेहरान पर हमला और शहर में दहशत
इसी दौरान ईरान की राजधानी तेहरान में भी स्थिति गंभीर हो गई। अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने संयुक्त रूप से एक बड़े हमले को अंजाम दिया। शहर के विभिन्न हिस्सों में तेज धमाके सुनाई दिए और नागरिकों में भय का माहौल बन गया। ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम को तुरंत सक्रिय किया गया, लेकिन इस हमले ने नागरिकों और सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में टोफिघ दारू फार्मास्युटिकल प्लांट को भी निशाना बनाया गया, जिससे देश की मेडिकल सप्लाई चेन प्रभावित हुई। इससे अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी दवाओं की कमी की संभावना जताई जा रही है।
अमेरिकी और इजरायली रणनीति और क्षेत्रीय प्रभाव
अमेरिका और इजरायल का यह संयुक्त ऑपरेशन क्षेत्र में अपनी सैन्य पकड़ मजबूत करने के इरादे से किया गया। यह ऑपरेशन 33वें दिन जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान संघर्ष में एक नया मोड़ साबित हो सकता है।
लेबनान और सीरिया में अल-जौहरी की मृत्यु के बाद ईरान की प्रतिक्रिया की संभावना बढ़ गई है। ईरानी मीडिया ने भी चेतावनी दी है कि उनके उच्च रैंकिंग अधिकारी और सैन्य संसाधनों को निशाना बनाने पर कड़ा जवाब दिया जाएगा। क्षेत्रीय राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि मध्य पूर्व में इस घटना के बाद तनाव और बढ़ सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी सतर्क हो गया है।
भविष्य के खतरे और वैश्विक सुरक्षा पर असर
मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव का असर वैश्विक सुरक्षा और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ और कदम उठाते हैं, तो पूरे क्षेत्र में संघर्ष और हिंसा फैल सकती है।
साथ ही, ईरान की फार्मास्युटिकल और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य और ऊर्जा सेक्टर में दबाव बढ़ सकता है। इस समय वैश्विक नजरें इस पर हैं कि ईरान किस तरह की जवाबी कार्रवाई करता है और क्या इस ऑपरेशन से अंतरराष्ट्रीय शांति प्रक्रिया प्रभावित होगी।
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