US Iran Talks: अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का रास्ता फिलहाल और कठिन होता जा रहा है। ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के सामने अपनी मुख्य मांगें रख दी हैं। इनमें सबसे बड़ी मांग यह है कि भविष्य में कोई भी सैन्य हमला ईरान पर न हो। इसके अलावा युद्ध में हुए नुकसान की पूरी भरपाई, होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर किसी भी तरह का प्रतिबंध न लगाना शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी सख्त शर्तों पर जल्दी सहमति बनना मुश्किल दिख रहा है।
ईरान ने और रखी अहम मांगें
ईरान ने केवल 4 प्रमुख मांगों तक सीमित नहीं रखा। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सभी सैन्य बेस बंद करने, इजरायल द्वारा हिजबुल्लाह पर हमले तुरंत रोकने और ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने की मांग भी की गई है। तेहरान का रुख पहले से अधिक सख्त है क्योंकि उनका कहना है कि ट्रंप ने पहले दो बार भरोसे को तोड़ा है। इसके चलते ईरान सिर्फ मध्यस्थों के जरिए ही अमेरिका से बातचीत करना चाहता है, न कि सीधे तौर पर।
मौजूदा जंग और तनावपूर्ण हालात
इसी बीच संघर्ष जारी है। हिजबुल्लाह ने हाइफा-नाहारिया पर 30 से अधिक रॉकेट दागे, जबकि ईरान ने इजरायल की एयरोस्पेस फैक्टरियों और शिराज एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले किए। इजरायल ने भी ईरानी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की। तेल की कीमतें 94-97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ा हुआ है। ईरान ने यह स्पष्ट किया है कि केवल गैर-दुश्मन देशों के जहाज ही इस क्षेत्र से सुरक्षित गुजर सकते हैं।
भारत का रोल और आगे की संभावनाएं
इस संवेदनशील समय में भारत भी सक्रिय है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ट्रंप से फोन पर बातचीत कर हॉर्मुज स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित रखने की अपील की। साथ ही, क्षेत्र में शांति कायम करने की जरूरत पर जोर दिया। फिलहाल, दोनों पक्षों का रुख सख्त है और अगर जल्द समझौता नहीं हुआ, तो ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट्स पर दोबारा हमले की चेतावनी भी दी है। दुनिया के कई देश युद्ध समाप्ति की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन ईरान की मांगों के कारण शांति वार्ता और पेचीदा होती जा रही है।
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