बंद होने वाला है दुनिया का ‘गैस चूल्हा’? कतर के CEO का ट्रंप पर फूटा गुस्सा—कहा, ‘मना किया था फिर भी इजरायल ने…’

मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी इजरायल और ईरान की जंग अब उस मोड़ पर पहुँच गई है, जहाँ से पूरी दुनिया का ‘चूल्हा’ बुझने का खतरा पैदा हो गया है। इसी हफ्ते इजरायल द्वारा ईरान के ‘साउथ पार्स’ (South Pars) गैस फील्ड पर किए गए हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। इस हमले से सबसे ज्यादा सदमे में कतर एनर्जी (QatarEnergy) के CEO साद अल-काबी हैं। उन्होंने अपनी गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वैश्विक ताकतों को जमकर खरी-खोटी सुनाई है। अल-काबी का कहना है कि उन्होंने बार-बार चेतावनी दी थी कि गैस ठिकानों को जंग से दूर रखा जाए, लेकिन उनकी अनसुनी की गई। अब इस लापरवाही का खामियाजा न केवल खाड़ी देशों को, बल्कि पूरी दुनिया को भुगतना पड़ सकता है।

‘साउथ पार्स’ पर हमला 

ईरान का साउथ पार्स दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस फील्ड है, जिसका एक हिस्सा कतर के पास है और उसे ‘नॉर्थ फील्ड’ कहा जाता है। ये दोनों फील्ड तकनीकी रूप से आपस में जुड़े हुए हैं। इजरायल के हालिया हमले में ईरान के हिस्से वाले गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुँचा है। कतर एनर्जी के CEO साद अल-काबी ने कहा कि इस हमले से कतर के ‘रास लफान’ (Ras Laffan) जैसे महत्वपूर्ण गैस प्रोसेसिंग केंद्रों को भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है। उनका तर्क है कि गैस की सप्लाई चेन बहुत नाजुक होती है; अगर एक तरफ आग लगती है, तो उसका असर पूरे नेटवर्क पर पड़ता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर एलएनजी (LNG) की सप्लाई में थोड़ी भी रुकावट आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें रॉकेट की तरह ऊपर जाएंगी, जिससे बिजली से लेकर रसोई गैस तक सब कुछ आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाएगा।

डोनाल्ड ट्रंप पर फूटा साद अल-काबी का गुस्सा

साद अल-काबी ने इस संकट के लिए सीधे तौर पर अमेरिकी नेतृत्व, खासकर डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कतर ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार गुहार लगाई थी कि ऊर्जा ठिकानों को ‘नो-गो ज़ोन’ यानी युद्ध से मुक्त क्षेत्र घोषित किया जाए। कतर का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने इजरायल को आक्रामक कदम उठाने से रोकने के लिए पर्याप्त दबाव नहीं बनाया। CEO ने कड़े शब्दों में कहा, “हमने बार-बार विनती की थी कि गैस ठिकानों को हाथ मत लगाना, लेकिन राजनीतिक फायदों और आपसी रंजिश के लिए दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को दांव पर लगा दिया गया।” कतर का यह कड़ा रुख साफ दिखाता है कि अब खाड़ी देश अमेरिका की मध्यस्थता और उसकी भूमिका से पूरी तरह असंतुष्ट हैं और उन्हें अपनी अर्थव्यवस्था डूबने का डर सता रहा है।

गैस इंफ्रास्ट्रक्चर की तबाही

ताजा खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली हमले ने साउथ पार्स के कुछ सबसे प्रमुख प्रोसेसिंग यूनिट्स और पाइपलाइनों को निशाना बनाया है। कतर को सबसे बड़ा डर यह है कि अगर ईरान ने जवाबी कार्रवाई में कतर के समुद्री रास्तों (होर्मुज जलडमरूमध्य) को बाधित कर दिया, तो गैस का निर्यात पूरी तरह ठप हो सकता है। फिलहाल, रास लफान प्लांट के पास सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए गए हैं, लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि गैस प्लांट को जो नुकसान पहुँचा है, उसे ठीक करने में कई महीने लग सकते हैं। कतर एनर्जी के अधिकारियों का कहना है कि वे हर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन मौजूदा तनाव को देखते हुए किसी भी समय वैश्विक सप्लाई चेन के टूटने का खतरा बना हुआ है, जिससे यूरोप और एशिया के देशों में हाहाकार मच सकता है।

 भारत की रसोई पर असर

यह विवाद केवल अरब देशों तक सीमित नहीं है; इसका सीधा असर भारत पर भी पड़ने वाला है। भारत अपनी जरूरत की प्राकृतिक गैस का एक बहुत बड़ा हिस्सा कतर से आयात करता है। अगर कतर और ईरान के बीच का यह गैस संकट और गहराता है, तो भारत में भी सीएनजी (CNG) और पीएनजी (PNG) की कीमतों में भारी उछाल आना तय है। कतर एनर्जी के CEO का यह बयान केवल एक निजी नाराजगी नहीं बल्कि दुनिया के लिए खतरे की घंटी है। जानकारों का मानना है कि अगर युद्ध और फैला, तो आने वाले दिनों में भारत में भी बिजली और गैस के दाम बढ़ सकते हैं। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में हलचल शुरू हो गई है और आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि दुनिया को इस साल ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ेगा या शांति का कोई नया रास्ता निकलेगा।

Read More-गौ-तस्करों का पीछा कर रहे ‘फरसा वाले बाबा’ की मौत! मथुरा में भड़का बवाल, CM योगी ने लिया संज्ञान

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img