धोखे का ‘शॉर्ट सर्किट’: Mercedes की लग्जरी कारों में निकली वो चीज, जिसकी वजह से कंपनी पर ठुका करोड़ों का जुर्माना!

दुनिया की सबसे भरोसेमंद और लग्जरी कार निर्माता कंपनियों में शुमार मर्सिडीज-बेंज इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में है। दक्षिण कोरिया के एंटीट्रस्ट रेगुलेटर, फेयर ट्रेड कमीशन (FTC) ने कंपनी पर करीब 11.24 बिलियन वॉन (लगभग 64 करोड़ भारतीय रुपये) का तगड़ा जुर्माना ठोक दिया है। यह कार्रवाई किसी छोटी-मोटी तकनीकी खराबी के लिए नहीं, बल्कि ग्राहकों को सीधे तौर पर ‘गुमराह’ करने के लिए की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मर्सिडीज ने अपनी प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारों (EVs) के विज्ञापन और मार्केटिंग के दौरान यह दावा किया था कि उनकी गाड़ियों में दुनिया की टॉप बैटरी कंपनी की टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की गई है, लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली। इस खुलासे ने न केवल कार प्रेमियों को हैरान कर दिया है, बल्कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में ‘पारदर्शिता’ पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे पकड़ी गई लग्जरी कार मेकर की ये बड़ी चालाकी?

इस पूरे स्कैम की परतें तब खुलीं जब अगस्त 2024 में दक्षिण कोरिया के इंचियोन स्थित एक अपार्टमेंट की पार्किंग में खड़ी मर्सिडीज-बेंज EQE मॉडल में अचानक आग लग गई। यह आग इतनी भयानक थी कि इसकी चपेट में आकर 140 से ज्यादा गाड़ियां जलकर खाक हो गईं। जब इस हादसे की जांच शुरू हुई, तो पता चला कि कार में वह बैटरी लगी ही नहीं थी जिसका वादा कंपनी ने किया था। मर्सिडीज ने आधिकारिक तौर पर और अपने डीलरशिप्स के जरिए ग्राहकों को बताया था कि उनके EQE और EQS मॉडल्स में मार्केट लीडर ‘CATL’ की बैटरी लगी है। जबकि जांच में सामने आया कि इनमें ‘Farasis Energy’ नाम की एक तुलनात्मक रूप से कम चर्चित चीनी कंपनी के बैटरी सेल्स का इस्तेमाल किया गया था। रेगुलेटर का कहना है कि कंपनी ने जानबूझकर यह जानकारी छिपाई ताकि लोग ब्रांड की साख देखकर महंगी गाड़ियाँ खरीदें।

रेगुलेटर का सख्त रुख और जुर्माने की पूरी कहानी

दक्षिण कोरियाई रेगुलेटर FTC ने इस मामले को “अनुचित व्यावसायिक व्यवहार” की श्रेणी में रखा है। जांच में यह भी पाया गया कि मर्सिडीज ने जून 2023 से अगस्त 2024 के बीच ऐसी करीब 3,000 गाड़ियाँ बेचीं, जिनमें गलत जानकारी दी गई थी। अधिकारियों ने कंपनी पर संबंधित बिक्री का 4 प्रतिशत जुर्माना लगाया है, जो कानून के तहत दी जाने वाली अधिकतम आर्थिक सजा है। FTC का मानना है कि बैटरी किसी भी इलेक्ट्रिक वाहन का दिल होती है और उसकी सुरक्षा और परफॉर्मेंस सप्लायर की साख पर निर्भर करती है। मर्सिडीज जैसे बड़े ब्रांड से ऐसी गलत जानकारी की उम्मीद नहीं थी, इसलिए अब न केवल जुर्माना लगाया गया है, बल्कि कंपनी के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए मामला प्रॉसीक्यूटर्स को भी सौंप दिया गया है।

क्या मर्सिडीज के प्रति बदलेगा ग्राहकों का भरोसा?

इस भारी-भरकम जुर्माने और सार्वजनिक बदनामी के बाद मर्सिडीज-बेंज बैकफुट पर है। कंपनी ने अब अपनी वेबसाइट पर बैटरी सप्लायर्स की सूची को अपडेट करना शुरू कर दिया है, ताकि भविष्य में इस तरह के विवादों से बचा जा सके। हालांकि, ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस घटना ने ‘ब्रांड लॉयल्टी’ को तगड़ा झटका दिया है। लग्जरी सेगमेंट के ग्राहक सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए ही लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करते हैं, और जब वहीं ‘धोखाधड़ी’ की बात सामने आती है, तो भरोसा टूटना लाजमी है। फिलहाल, दक्षिण कोरिया की इस कार्रवाई ने दुनियाभर के कार निर्माताओं को एक कड़ा संदेश दिया है कि विज्ञापनों में किए गए वादे और हकीकत के बीच का अंतर अब कंपनियों को बहुत महंगा पड़ सकता है।

Read More-पत्नी की हत्या के बाद 10 साल से फरार भारतीय! अब सुराग देने वाले को मिलेगा 9.2 करोड़ का इनाम

 

Hot this week

लखनऊ में शंकराचार्य के कार्यक्रम पर 26 शर्तें, अखिलेश यादव बोले- “आंख-मुंह भी नापकर खोलें?”

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्वामी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img