हाई कोर्ट की शरण में पहुंचा जेल में बंद इंजीनियर राशिद, जाने किससे जताई मिलने की इच्छा

तिहाड़ जेल में बंद जम्मू-कश्मीर के बारामूला से सांसद इंजीनियर राशिद ने अपने बीमार पिता से मिलने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अदालत से अंतरिम जमानत देने की अपील की है, ताकि वह अस्पताल में भर्ती अपने पिता से मिल सकें। राशिद इस समय राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दर्ज आतंकी फंडिंग मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले निचली अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत की मांग को खारिज कर दिया था, जिसके बाद अब उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मानवीय आधार पर राहत मांगी है। यह मामला अब संवेदनशील और कानूनी दोनों पहलुओं के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है।

एनआईए का विरोध और कस्टडी पैरोल का विकल्प

इस पूरे मामले में एनआईए ने पहले ही निचली अदालत में अंतरिम जमानत का विरोध किया था। एजेंसी का कहना है कि राशिद पर गंभीर आरोप हैं और उन्हें जमानत देने से सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। हालांकि, एनआईए ने यह भी साफ किया है कि अगर अदालत चाहे तो कस्टडी पैरोल का विकल्प अपनाया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि राशिद को पुलिस हिरासत में रहते हुए अपने पिता से मिलने की अनुमति दी जा सकती है। एनआईए के वकील ने अदालत में दलील दी कि जब कस्टडी पैरोल का विकल्प मौजूद है, तो अंतरिम जमानत की आवश्यकता नहीं है। इस तर्क के चलते मामला और भी जटिल हो गया है, क्योंकि अदालत को अब मानवीय पहलू और सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन बनाना होगा।

पहले भी मिल चुकी है सीमित राहत

यह पहली बार नहीं है जब इंजीनियर राशिद को किसी विशेष परिस्थिति में राहत मिली हो। इससे पहले जनवरी में उन्हें संसद के बजट सत्र में भाग लेने के लिए कस्टडी पैरोल दी गई थी। उस दौरान वह पुलिस निगरानी में रहकर लोकसभा की कार्यवाही में शामिल हुए थे। हालांकि उस समय अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया था कि उनकी यात्रा और सुरक्षा से जुड़े खर्चों का अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय में लंबित मामले पर निर्भर करेगा। इससे पहले भी उन्होंने अदालत में यह मुद्दा उठाया था कि एक जनप्रतिनिधि के तौर पर इतने भारी खर्च का बोझ उनके कामकाज में बाधा डालता है।

कानूनी विवाद और आगे की राह

इंजीनियर राशिद के मामले में नवंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला भी चर्चा में रहा था, जब दो जजों के बीच मतभेद देखने को मिला था। एक जज ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था, जबकि दूसरे ने राहत देने का समर्थन किया था। इसके बाद मामला आगे की प्रक्रिया के लिए मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा गया था। अब एक बार फिर राशिद की नई याचिका ने इस मामले को सुर्खियों में ला दिया है। उनके वकील का कहना है कि मानवीय आधार पर उन्हें अपने बीमार पिता से मिलने का अधिकार मिलना चाहिए, जबकि एजेंसियां सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस बार क्या फैसला सुनाती है और क्या राशिद को अपने पिता से मिलने का अवसर मिल पाता है या नहीं।

Read More-भाषण के बीच गूंजा शोर, मंच छोड़ गईं Mamata Banerjee, भवानीपुर में क्या हुआ?

 

Hot this week

भाषण के बीच गूंजा शोर, मंच छोड़ गईं Mamata Banerjee, भवानीपुर में क्या हुआ?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img