देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में रोजाना कई महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई होती है, लेकिन कई बार ऐसी याचिकाएं भी सामने आ जाती हैं जिन्हें अदालत गंभीर नहीं मानती। हाल ही में एक ऐसा ही मामला सुनवाई के दौरान सामने आया, जब एक छोटे व्यापारी द्वारा दायर की गई याचिका को कोर्ट ने बेतुका बताते हुए कड़ी फटकार लगाई। यह मामला टैक्स में राहत से जुड़ा था, जिसे लेकर एक जैकेट बेचने वाले व्यापारी ने याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस की बेंच ने याचिका की भाषा और उसमें इस्तेमाल किए गए जटिल शब्दों पर सवाल उठाए। अदालत को यह देखकर हैरानी हुई कि एक छोटे व्यापारी की याचिका में ऐसे कठिन कानूनी और अंग्रेजी शब्द लिखे गए थे, जो आम तौर पर विशेषज्ञ ही इस्तेमाल करते हैं। इसी वजह से कोर्ट को संदेह हुआ कि याचिका किसी और ने तैयार की है।
CJI ने पूछे पढ़ाई और स्कूल से जुड़े सवाल
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सीधे याचिकाकर्ता से सवाल पूछना शुरू कर दिया। उन्होंने पूछा कि क्या यह याचिका वास्तव में उसी ने लिखी है। इस पर याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसने यह याचिका खुद तैयार की है। इसके बाद अदालत ने उसकी पढ़ाई के बारे में सवाल किए। जब उसने बताया कि वह केवल 12वीं तक पढ़ा है और लुधियाना के एक स्कूल से पढ़ाई की है, तो अदालत को और भी संदेह हुआ। याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा और शब्दों को देखते हुए अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है कि इसे किसी और ने लिखा है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि याचिका का लहजा और उसमें दिए गए संवैधानिक तर्क यह नहीं दर्शाते कि इसे एक छोटे व्यापारी ने खुद लिखा होगा।
कोर्ट में अंग्रेजी परीक्षा की बात से बढ़ा माहौल
सुनवाई के दौरान माहौल उस समय और रोचक हो गया जब मुख्य न्यायाधीश ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर याचिकाकर्ता ने वास्तव में यह याचिका खुद लिखी है तो अदालत में ही उसकी अंग्रेजी की परीक्षा ली जा सकती है। उन्होंने कहा कि अगर वह परीक्षा में कम से कम 30 अंक ले आता है तो अदालत उसकी बात पर विचार करेगी। यह सुनकर याचिकाकर्ता ने परीक्षा देने की सहमति भी जता दी। हालांकि अदालत ने उसे साफ शब्दों में चेतावनी दी कि सच बताना ही बेहतर होगा, वरना उसके खिलाफ जुर्माना लगाया जा सकता है और मामले की जांच भी करवाई जा सकती है। इस दौरान अदालत ने याचिका में इस्तेमाल किए गए कुछ जटिल शब्दों का मतलब भी पूछा, जिनका सही जवाब देना याचिकाकर्ता के लिए मुश्किल हो गया।
अंत में अदालत ने दी सख्त चेतावनी
पूरी सुनवाई के दौरान अदालत ने यह स्पष्ट किया कि न्यायालय का समय बेहद कीमती होता है और बिना ठोस आधार के याचिका दाखिल करना गलत है। अदालत ने याचिकाकर्ता को सख्त चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी याचिकाएं दाखिल न करें। साथ ही यह भी कहा कि अगर ऐसी हरकत दोबारा हुई तो भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। सुनवाई के अंत में अदालत ने उसे सलाह दी कि वह अपने व्यापार पर ध्यान दे और अनावश्यक कानूनी विवादों में समय बर्बाद न करे। यह मामला अब सोशल मीडिया और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि अदालत में हुई यह बातचीत काफी दिलचस्प और सख्त दोनों थी।








