मौत की दीवार: गुरुग्राम में काम के बीच मलबे में दबीं कई जिंदगी, क्या लापरवाही ने ली 7 मजदूरों की जान?

Gurugram News: हरियाणा के साइबर सिटी गुरुग्राम से सटे सिधरावली इलाके में सोमवार की रात उस समय चीख-पुकार मच गई, जब एक निर्माणाधीन आवासीय सोसायटी की विशालकाय दीवार ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे ने न केवल 7 परिवारों के चिराग बुझा दिए, बल्कि कंस्ट्रक्शन साइट्स पर सुरक्षा मानकों की पोल भी खोल कर रख दी है। रात के अंधेरे में हुए इस हादसे के वक्त मजदूर अपनी दिहाड़ी पूरी कर या तो काम समेट रहे थे या थकान मिटाने के लिए दीवार के साये में सुस्ता रहे थे। उन्हें इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि जिस दीवार को वे खड़ा कर रहे हैं, वही उनकी कब्रगाह बन जाएगी।

चीख-पुकार और मलबे का ढेर: जब मौत बनकर गिरी दीवार

सोमवार की रात सिधरावली में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन अचानक एक गगनभेदी आवाज ने सन्नाटे को चीर दिया। निर्माणाधीन सोसायटी परिसर में काम कर रहे मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। भारी भरकम दीवार सीधे उनके ऊपर आ गिरी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका इतना जोरदार था कि आसपास के लोग भूकंप समझकर घरों से बाहर निकल आए। धूल का गुबार छंटने के बाद जो मंजर दिखा, वह दिल दहला देने वाला था। लोहे के सरियों और कंक्रीट के ढेर के नीचे कई मजदूर दबे हुए थे। प्रशासन को सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें मौके पर पहुंचीं। रोशनी के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण शुरुआती रेस्क्यू में काफी दिक्कतें आईं, लेकिन भारी मशीनों और क्रेन की मदद से घंटों की मशक्कत के बाद मलबे को हटाया जा सका।

7 घरों में मातम और 4 मजदूरों की हालत नाजुक

इस भीषण त्रासदी में अब तक सात मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मलबे से निकाले गए शवों को देखकर वहां मौजूद बचाव दल की आंखें भी नम हो गईं। मृतकों में से अधिकांश वे लोग थे जो अपने गांवों से सुनहरे भविष्य और परिवार की दो वक्त की रोटी के लिए शहर आए थे। इसके अलावा, चार अन्य मजदूर इस समय अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच की जंग लड़ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है क्योंकि मलबे के दबाव के कारण उन्हें अंदरूनी चोटें आई हैं। मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी गई है और पूरे इलाके में सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। स्थानीय लोग इस घटना के बाद से गहरे सदमे और गुस्से में हैं।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी: आखिर जिम्मेदार कौन?

इस हादसे ने एक बार फिर गुरुग्राम के रियल एस्टेट सेक्टर में सुरक्षा ऑडिट की जरूरत पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। क्या दीवार बनाने में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था? क्या नींव उतनी मजबूत नहीं थी कि दीवार का बोझ सह सके? या फिर निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया था? विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी दीवार का अचानक गिरना किसी तकनीकी खामी या भारी लापरवाही का नतीजा हो सकता है। फिलहाल, जिला प्रशासन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या समय रहते निर्माण कार्य का निरीक्षण किया गया था? अगर लापरवाही सिद्ध होती है, तो क्या बिल्डर और ठेकेदार पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

मुआवजे की मांग और प्रशासन की अगली कार्रवाई

घटना के बाद से ही मजदूर संगठनों और स्थानीय निवासियों में भारी रोष है। मांग की जा रही है कि मृतक मजदूरों के परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए और दोषियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाए। गुरुग्राम प्रशासन का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराना है। पुलिस ने घटनास्थल को सील कर दिया है और फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम मलबे के नमूने ले रही है ताकि दीवार गिरने के असली कारणों का पता लगाया जा सके। यह हादसा एक चेतावनी है उन सभी कंस्ट्रक्शन कंपनियों के लिए जो मुनाफे के चक्कर में इंसानी जानों के साथ खिलवाड़ करती हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से न्याय सुनिश्चित करता है।

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